बिलाड़ा (जोधपुर). नवरात्र महोत्सव परवान पर है। शाम होते-होते कस्बे के विभिन्न स्थानों पर हाथों में डांडिया लेकर घरों से गरबा स्थल पर पहुंच जाते हैं। इस बार अधिकतर डांडिया नृत्य करने वाले गुजराती वेशभूषा की चोली, अचकन, घेरदार कुर्ती, काठियावाड़ी पायजामा, अंगरखी पहन कर आने लगे हैं। कई नवयुवक एवं नवयुवतियां, देवी-देवताओं के स्वांग में गरबा मंडल तक पहुंच देर रात तक नाचते देखे जा रहे हैं।
गुजराती परिधानों की लगी है दुकानें
अब तक यहां के गरबा मंडलों तक स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में ही नाचने आया करते थे। लेकिन इस बार कस्बे के सदर बाजार में गुजराती फैशन के परिधानों की दुकानें सज चुकी हैं। इनके यहां बनासकांठा, साबरकांठा एवं काठियावाड़ क्षेत्र में पहने जाने वाले रंग-बिरंगे कपड़ों की सेल लगाई गई है। गरबा नाचने वालों में यह गुजराती कपड़े आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं।
कोई पीछे नहीं
गुजराती कपड़ों में गरबा नाचने का क्रेज लड़कियों में बढ़ा है, तो युवा भी पीछे नहीं है। वे भी काठियावाड़ी घेरदार चूड़ीदार पायजामा एवं घेरदार अंगरखी, जिस पर लाल, हरा और पीला कशीदाकारी का काम किया होता है। स्थानीय स्तर पर इसे रासलीला ड्रेस का नाम दिया गया है। उसी तरह कांच एवं मीनाकारी का काम किए घाघरा, चोली, चनिया एवं ओढऩी भी लड़कियों को खूब भा रही है।
गुजराती कपड़े बेचने वाले एक दुकानदार का कहना है कि इस बार उसकी दुकान से डांडिया, गुजराती कपड़े एवं गुजराती गरबा के गीतों की सीडियों की अच्छी बिक्री हुई है। एक अन्य महिला दुकानदार यह गुजराती कपड़े, जहां-जहां गरबा होता है, वहां अपनी ओर से प्रदर्शनी भी लगा कर इन कपड़ों की ओर लोगों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।
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