डेढ़ करोड़ से सुधरेगी कुरजां के पड़ाव स्थल की काया

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फलोदी (जोधपुर). खीचन में कुरजां के पड़ाव स्थलों के विकास के लिए वन्यजीव विभाग द्वारा तैयार की गई 1.50 करोड़ की डीपीआर को लेकर जोधपुर के संभागीय मुख्य वन संरक्षक रघुवीरसिंह शेखावत मंगलवार को फलोदी क्षेत्र के दौरे पर रहे।

इस दौरान उन्होंने फलोदी में वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए तथा कुरजां के पड़ाव स्थलों का दौरा कर पक्षियों के व्यवहार, प्रतिवर्ष की संख्या व अन्य जानकारी ली।

खीचन में कुरजां प्रवास स्थलों को उनके लिए उपयुक्त बनाने व यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए यहां 1.50 करोड़ की लागत से विकास कार्य करवाए जाने है। इसके लिए वन्यजीव विभाग द्वारा डीपीआर बनाकर पर्यटन विभाग के आयोजना में भेजी गई है।

जिसमें कुरजां के पड़ाव स्थलों के आस-पास उगे जूलीफ्लोरा को हटाकर उपयुक्त घास व पौधे लगाने, अलग-अलग वॉटर पॉन्ड का निर्माण करवाने, नदी के पास भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण, पर्यटकों के लिए कुरजां को निहारने के लिए ग्रेवल पाथ, बैठने के लिए रिसेप्शन सेंटर, पार्किंग, बर्ड वॉचिंग पॉइन्ट का निर्माण, रातड़ी नाडी पर कुरजां की आवारा श्वानों से सुरक्षा के लिए तारबन्दी आदि कार्य होंगे।

सीसीएफ शेखावत ने रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण कर अधिकारियों को यहां घायल पक्षियों के लाने के लिए पिंजरे की व्यवस्था करने, वन्यजीवों के लिए यहां प्राकृतिक आवास उपलब्ध करवाने, रेस्क्यू सेंटर में दवाईयां, चुग्गा, पानी आदि व्यवस्थाएं सुचारू करने के निर्देश दिए। उन्होंने खीचन पंहुचकर कुरजां के पड़ाव स्थलों का दौरा किया।

 

इस दौरान पक्षी चुग्गाघर पंहुचकर वहां कुरजां के प्रतिदिन आने, चुग्गा लेने, तालाबों पर विचरण, रात्रि विश्राम, प्रतिवर्ष कुरजां के आने व वतन आपसी आदि की जानकारी ली तथा कुरजां की अठखेलियां देखकर अभिभूत हो उठे। उन्होंने खीचन में कुरजां के लिए आरक्षित 400 बीघा भूमि का अवलोकन भी किया। इस दौरान सहायक वन संरक्षक नरेन्द्रसिंह शेखावत, क्षेत्रीय वन अधिकारी जेठमालसिंह सोढ़ा, पक्षी प्रेमी सेवाराम माली आदि उपस्थित रहे।

 

सीसीएफ शेखावत ने पक्षी प्रेमी सेवाराम माली से कुरजां के बारे में जानकारी ली तो उन्होंने स्वयं द्वारा तैयार किया गया सालों का कुरजां से संबंधित रिकॉर्ड उनके सामने पेश कर दिया। जिस पर उन्होंनें उप वन संरक्षक वन्यजीव को निर्देश दिए कि कुरजां का नियमित रिकॉर्ड संधारित किया जाए। जिससे कुरजां के यहां शीतकालीन प्रवास पर पंहुचने, प्रतिदिन चुग्गा लेने, कुरजां की संख्या आदि की जानकारी मिल सके।



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