गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. स्वच्छ भारत अभियान से आने वाले कु छ समय में हेपेटाइटिस, डायरिया सहित लीवर क ी क ई बीमारियां जड़ से खत्म होने क ी उम्मीद जताई जा रही है। इससे इन बीमारियों के उपचार व बचाव पर खर्च होने वाला देश क ा क रोड़ों रुपया बचेगा। गंदगी व पानी जनित बीमारियां क म होने से शिशु मृत्यु दर को भी क म कि या जा सके गा। मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (डीएमआरसी) में चल रहे राजस्थान क ॉन्क्लेव में शामिल होने जोधपुर आए राष्ट्रीय विज्ञान अक ादमी भारत (एनएएसआई) के चेयर प्रोफेसर व भारतीय चिकि त्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक डॉ. विश्वमोहन क टोच ने राजस्थान पत्रिक ा से बातचीत में बताया कि इंग्लैण्ड सहित क ई पश्चिमी देशों में स्वच्छता के माध्यम से हेपेटाइटिस, डायरिया और मच्छर जनित रोगों को दूर रखा जाता है।
अक्टूबर 2014 से शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के बाद देश शत प्रतिशत ओडीएफ हो रहा है। साफ सफाई से हेपेटाइटिस ए, ई, डायरिया, टाइफाइड, हैजा, एस्केरिसस, टीनिया, एनिमिया जैसी क ई बीमारियों क ा ग्राफ तेजी से नीचे आ रहा है। डब्ल्यूएचओ क ी एक रिपोर्ट के अनुसार इससे देश में हर साल 3 लाख लोगों क ी जान बचेगी। वर्तमान में 11 महीने से क म आयु के एक लाख बच्चे डायरिया से दम तोड़ देते हैं। इसमें भारी कमी आएगी। शिशु मृत्यु दर एक हजार में से 34 क ा ग्राफ घटक र नीचे आ जाएगा।
एडिज के खिलाफ क रना होगा ऑर्गेनाइज्ड अटैक
डॉ. क टोच ने बताया कि मलेरिया का वाहक एनोफिलिज मच्छर अब क ाबू में आ गया है। लेकिन एडिज मच्छर परेशान कर रहा है। अब उससे डेंगू, चिक नगुनिया के साथ जीक ा का भी खतरा हो गया है। एडिज के खिलाफ सरक ार और आम नागरिक ों क ो ऑर्गेनाइज्ड अटैक क ी रणनीति बनानी पड़ेगी। उष्णक टिबंधीय जलवायु क ी वजह से मच्छरों से पूरी तरीके से निजात नहीं मिल सक ती लेकिन उन पर नियंत्रण कि या जा सक ता है।
एचआईवी व टीबी क ार्यक्रम एक साथ
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने टीबी की बीमारी क ो वैश्विक लक्ष्य से पांच साल पहले 2030 तक खत्म क रने क ा लक्ष्य रखा है। हाल ही में एचआईवी और टीबी क ार्यक्रम दोनों क ो एक साथ मर्ज क रके खत्म क रने क ी रणनीति है। इसमें क ाफी सफलता मिल रही है। डॉ. क टोच ने बताया कि अब जलवायु परिवर्तन के क ारण स्वास्थ्य पर पडऩे वाला नक ारात्मक प्रभाव चुनौती है। इस पर शोध कि या जा रहा है। मच्छर ऐसी जगह भी पहुंच गए हैं जहां पहले नहीं मिलते थे। सर्दी क म हो गई, बारिश एक साथ गिर रही है। इन वजहों से अब बीमारियां क्षेत्रियता के आधार पर हो रही है। जिसक ा अगले कु छ सालों में निदान मिलने की उम्मीद है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2R76nQS
0 comments:
Post a Comment