सड़क किनारे डाल रहे वेस्ट, हादसों को दे रहे न्यौता

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जोधपुर।

पर्यावरण नियमों को धत्ता बताकर चल रही स्टोन कटिंग युनिटों (पत्थर काटने की इकाइयां) से निकलने वाला वेस्ट जल-हवा में मिलकर पर्यावरण को तो प्रदूषित कर ही रहा है, साथ ही अब हादसों को भी न्यौता दे रहा है। इसकी वजहखानधारकों द्वारा इकाइयों से निकलने वाले वेस्ट को अब सड़क किनारे ही डाला जा रहा है। हाल यह हो गए है कि सड़क किनारे डाले जा रहे वेस्ट के पहाड़ बन गए है, जो कभी भी सड़क पर गिर हादसे को अंजाम दे सकते है। बालसमंद से चौपड़, केरू, पाबूमगरा, जोगीमगरा, कालीबेरी, भूरीबेरी आदि क्षेत्रों में चल रही खानों के वेस्ट के पहाड़ सड़क किनारे ही दिखाई देंगे। खान विभाग की ओर से खनन क्षेत्र विकसित करने पर उस क्षेत्र में ही एक स्थान वेस्ट डालने के लिए चिन्हित किए जाते है। अब जिस अनुपात में खान व क्वारी लाइसेंसों में खनन हो रहा है। उसके मुकाबले डम्प क्षेत्र नगण्य है। परिणामस्वरूप, स्टोन कटिंग संचालकों द्वारा लंबे समय से खनन क्षेत्रों से निकलने वाले वेस्ट को इधर-उधर व अपनी इकाइयों के बाहर सड़क किनारे ही डाला जा रहा है। खुले में डाला जा रहा खनन इकाइयों का वेस्ट पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। जोधपुर-बालेसर में करीब 12 हजार खानें संचालित हो रही है। जिनसे नित्य वेस्ट निकल रहा है और खानधारकों द्वारा मनमर्जी के डम्पिंग स्टेशन बनाकर वेस्ट निस्तारित किया जा रहा है। जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे है।

 

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न मॉनिटरिंग न नया चिन्हित क्षेत्र

नियमानुसार खनन क्षेत्रों का वेस्ट डालने के लिए खान विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्व विभाग की ओर से निरीक्षण कर चिन्हित क्षेत्र निर्धारित किए जाते है। विभाग की ओर से खनन क्षेत्रों के वेस्ट के लिए मॉनिटरिंग नहीं की जाती है। इस वजह से खानधारक सिम्प्लीफाइड माइनिंग स्कीम (एसएमएस) आवेदन प्रस्तुत करते समय खनन संंबंधी जानकारी में वेस्ट के निस्तारण की जानकारी तो दे देते है, लेकिन उनकी पालना नहीं करता। इसके अलावा, जो खानें बंद हो गई, कैन्सिल हो गई या जिन खानों से उत्पादन बंद हो गया। उनको भी नए चिन्हित क्षेत्र के रूप मे विकास नहीं किया जा रहा है।

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यह गंभीर बात है। खनन इकाइयों से निकलने वाले वेस्ट की मॉनिटरिंग के लिए टीम भी बनाई हुई है। मैं उनसे प्रगति रिपोर्ट लूंगा और खानधारकों को पाबंद करेंगे। वेस्ट के लिए नए चिन्हित क्षेत्रों के लिए विभागीय स्तर पर मीटिंग कर निर्णय लेंगे।श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिंग इंजीनियर

जोधपुर



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