जोधपुर.
शहर में चल रही स्टोन कटिंग इकाइयों के विरुद्ध लोकायुक्त में दर्ज शिकायत पर लोकायुक्त को सही जानकारी नहीं दी गई। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त में दस्तावेज पेश कर जिला कलेक्टर व राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जयपुर के सदस्य सचिव की ओर से प्रस्तुत जानकारी पर आपत्ति जताई। शहर में नियम विरूद्ध चल रही स्टोन कटिंग इकाइयों को लेकर शिकायत पर लोकायुक्त ने जिला कलेक्टर व राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव से जानकारी मांगी थी। जिस पर जिला कलेक्टर व सदस्य सचिव ने शिकायत में किए गए कई बिंदुओं को नजरअंदाज कर दिया। जिला कलेक्टर की ओर से स्टोन कटिंग इकाइयों के संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर वाद संख्या की जानकारी गलत देकर वाद को खारिज होना बताया गया । दी गई जानकारी के अनुसार, राजस्थान उच्च न्यायालय में वाद संख्या 877/17 बताया गया जबकि न्यायालय में दायर वाद की संख्या 8770/17 थी।
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इनकी जानकारी ही नहीं दी
- आखलियों पर नियम विरूद्ध पक्के निर्माण व स्टोन कटिंग गतिविधियों के संबंध में जानकारी ही नहीं दी गई। अधिकांश आखलियों पर पक्के निर्माण है व क्वारी लाइसेंसों (छोटी खानें) में खनन के अलावा स्टोन कटिंग का कार्य हो रहा है। राजस्व विभाग की ओर से जारी नियमों के अनुसार आखलियों पर पक्के निर्माण व स्टोन कटिंग का काम नहीं हो सकता ।
- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण सम्मति जारी करने से पूर्व निश्चित किया जाता है कि जिन भूखण्डों पर औद्योगिक इकाइयां लगी है, उनका भू-रूपान्तरण कराया गया है या नहीं। जानकारी के अनुसार, इन इकाइयों में से कोई भूमि औद्योगिक भूमि में रूपान्तरित नहीं है। विभाग ने बिना भूमि रूपान्तरण ही पर्यावरण सम्मति जारी की।
- विभाग की ओर से जिस क्षेत्र में पर्यावरण सम्मति जारी की जाती है, वहां स्टोन कटिंग इकाई से निकलने वाले स्लरी व वेस्ट के लिए चिन्हित स्थान निर्धारित होता है। वर्तमान में स्लरी व वेस्ट के लिए चिन्हित स्थान नहीं है।
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जिला कलेक्टर व राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जयपुर के सदस्य सचिव ने सही जानकारी नहीं दी। मैने लोकायुक्त के समक्ष पेश होकर सही दस्तावेज पेश कर तथ्यात्मक जांच की मांग की।
महेन्द्र बोहरा, शिकायतकर्ता
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