दूर हुआ पांच वर्ष का अलगाव, खुशी-खुशी गाड़ी में बैठ घर गए पति-पत्नी

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जोधपुर

 

राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर मुख्यपीठ और जिला अदालतों में शनिवार को इस वर्ष की चौथी लोक अदालत आयोजित की गई। हाईकोर्ट में आयोजित लोक अदालत में 146 और जिला अदालतों में 23 बेंचों के माध्यम से 1,405 प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

 

हाईकोर्ट और जिला अदालतों ने कुल 18 करोड़ रुपए से अधिक के अवार्ड भी पारित किए। तलाक की अर्जी लगा चुके, पांच वर्ष से अलग रह रहे दम्पती पारिवारिक न्यायालय में एक घंटे की समझाइश के बाद फिर से साथ रहने को सहमत हो राजीखुशी गाड़ी में बैठ घर के लिए रवाना हुए।

 

उच्च न्यायालय में लोक अदालत के लिए पांच बेंच गठित की गई। इनमें जस्टिस संगीतराज लोढा, निर्मलजीत कौर, पुष्पेन्द्रसिंह भाटी, विनितकुमार माथुर और जस्टिस मनोजकुमार गर्ग ने सहयोगी सदस्य के साथ लंबित प्रकरणों में सुनवाई की और दस वर्ष से भी अधिक समय से लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया।

 


राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के अनुसार मोटर दुर्घटना और दीवानी मामलों का निस्तारण कर करीब दो करोड़, 94 लाख, 16 हजार रुपए के अवॉर्ड पारित किए गए।

 

जोधपुर महानगर जिला न्यायक्षेत्र में स्थित सभी न्यायालयों व स्थाई लोक अदालत की कुल 23 बेंचों के माध्यम से 1,405 प्रकरणों का निस्तारण कर 16 करोड़, 41 लाख, 9 हजार, 592 रुपए के अवार्ड राशि पारित किए गए। एडीजे संख्या दो में सिर्फ एक मामले में 73 लाख रुपए के एक मामले का निस्तारण किया गया तो पारिवारिक न्यायालय में पति-पत्नी के रिश्तो में आई दरार को पाटते हुए रिश्तों को फिर से जोड़ा गया।

लोक अदालत में 10 वर्ष से पुराने करीब 35 और 5 से 10 वर्ष के बीच के करीब 130 प्रकरण का राजीनामे से निस्तारण किया गया। एक प्रकरण एमएसीटी न्यायालय जोधपुर महानगर की बेंच के पीठासीन अधिकारी सत्यनारायण व्यास ने बसंती देवी बनाम टाटा आइजी प्रकरण में 59 लाख का अवार्ड किया गया।

 

एडीजे (दो) की न्यायाधीश नीतू आर्य ने मैसर्स देवेंद्र कंस्ट्रक्शन कम्पनी और पीएचइडी विभाग के बीच वर्षो से भुगतान के सम्बन्ध में विवाद को मिनिटों में सुलझा दिया। इसके बाद पीएचईडी ने कंस्ट्रक्शन कम्पनी के मालिक को 73 लाख, 25 हजार,109 रुपए चैक सौंपा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।


महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन ने घरेलू हिंसा के एक मामले में पत्नी और पुत्र के भरण पोषण के लिए दस हजार रुपए देने के आदेश दिए।

 

समझाइश से भूले मतभेद

 

पारिवारिक न्यायालय संख्या एक के न्यायाधीश साहबराम मोटयार ने तलाक और भरण पोषण के 15 से अधिक मामलों में पति-पत्नी के बीच सुलह करवाई। इस न्यायालय में कुल 292 मामले रखे गए थे।

 

गुलाब सागर निवासी राजेंद्र कच्छावा (43) और माता का थान निवासी सीमा ने वैचारिक मतभेद के चलते इस वर्ष 12 जनवरी को पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी लगा दी। दोनों का विवाह 26 अप्रेल 2001 को हुआ था। दोनों के एक पुत्र और एक पुत्री है। एक घंटे की समझाइश का सकारात्मक परिणाम आया और पांच वर्ष से अलग रह रहे पति-पत्नी मतभेद भुलाकर राजीखुशी गाड़ी में साथ बैठकर घर गए।

 



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