एक आदमी के पास एक गाय थी और एक
गधा था वो गाय को बहुत प्यार से
रखता था लेकिन गधे को बहुत
मारता पिटता था ओर उसे ठीक से
खाना भी नही देता था. एक शाम जब दोनो पास मेँ
ही बंधे थे तो गाय ने पूछा की मालिक तुमसे
इतना काम कराता है ओर तुम्हेँ
इतना मारता पिटता है और तुम्हेँ
अच्छा खाना भी नहीँ देता, तुम यहाँ से भाग
क्योँ नहीँ जाते मैँ तुम्हारी रस्सी खोल देती हूँ।
तब गधा बोला तुम तो जानती ही हो दिन मे
मालिक मुझे कितना ही मारे पीटे लेकिन शाम
को वो मेरे पैर पकड लेते है तो (रात मे गधे के पैर
बाँध दिये जाते हैँ) तो मैँ कहता हुँ जा तुझे माफ
किया!
इसलिये हम सब गधे है! जब नेता लोग चुनाव
नजदीक आ जाते है तो नेता लोग हमारे पैर छुने
को भी तैयार हो जाते हैँ ओर हम फिर
उन्ही को वोट देने को तैयार हो जाते हैँ! इसलिये
इस बार हमेँ सही लोगोँ को वोट करना है. आप
लोगो से भी यही अपील है कि हम गधे नहीँ हैँ...
सहमत हो तो करो लाइक???
नत्थाराम डाँगी
गधा था वो गाय को बहुत प्यार से
रखता था लेकिन गधे को बहुत
मारता पिटता था ओर उसे ठीक से
खाना भी नही देता था. एक शाम जब दोनो पास मेँ
ही बंधे थे तो गाय ने पूछा की मालिक तुमसे
इतना काम कराता है ओर तुम्हेँ
इतना मारता पिटता है और तुम्हेँ
अच्छा खाना भी नहीँ देता, तुम यहाँ से भाग
क्योँ नहीँ जाते मैँ तुम्हारी रस्सी खोल देती हूँ।
तब गधा बोला तुम तो जानती ही हो दिन मे
मालिक मुझे कितना ही मारे पीटे लेकिन शाम
को वो मेरे पैर पकड लेते है तो (रात मे गधे के पैर
बाँध दिये जाते हैँ) तो मैँ कहता हुँ जा तुझे माफ
किया!
इसलिये हम सब गधे है! जब नेता लोग चुनाव
नजदीक आ जाते है तो नेता लोग हमारे पैर छुने
को भी तैयार हो जाते हैँ ओर हम फिर
उन्ही को वोट देने को तैयार हो जाते हैँ! इसलिये
इस बार हमेँ सही लोगोँ को वोट करना है. आप
लोगो से भी यही अपील है कि हम गधे नहीँ हैँ...
सहमत हो तो करो लाइक???
नत्थाराम डाँगी

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