रक्षाबंधन विशेष : सरहद पार,बहना का प्यार, याद आई बेशुमार

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधप़ुर.सरहद की लकीरें रिश्तों की डोर को कच्चा नहीं कर सकीं। राखी पर बहनें भाई के लिए तो भाई बहनों के लिए तरसते हैं, तड़पते हैं। पाकिस्तान विस्थापित कई परिवारों का यही हाल है। कुछ पाकिस्तान विस्थापित भाई भारत मेंं और बहनें पाकिस्तान में तो कुछ बहनें भारत में और भाई पाकिस्तान में एक दूसरे की शक्ल देखने और उनके राखी बांधने के लिए तरसते हैं। सरहद पार बहना के प्यार पर दोनों को आई याद बेशुमार। आइए आप को मिलाते हैं बटवारे का दर्द सहते ऐसे ही बहन भाइयों से कि वो इस राखी के त्योहार पर कैसे महसूस करते हैं। पेश है राखी पर पाकिस्तान विस्थापितों पर स्पेशल रिपोर्ट :

 

केस-1

पांच साल से भारत में रह रही है कुंजल

ये कुंजल हैं। उन्होंने बताया कि उनके दो भाई हैं एक का नाम है बालमराम और दूसरे के नाम है कमलराम। दोनों भाई अभी भी पाकिस्ताान से सटी बीकानेर से लगती सीमा के उस पार रहते हैं। परिवार को यहां आए 5 साल हो गए हैं, लेकिन एक बार भी भाइयों को राखी नहीं बांध सकी। उसे अपने भाइयों की बहुत याद आ रही है।

केस-2

छह साल से राखी बांधने को तरसती नीलावंती
नीलावंती ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान से आए 7 साल हुए हैं। इन के 3 भाई रामचंद, सतराम, और परमानन्द हैं। वे जब भारत आईं थीं तो इनका भाई परमानन्द इनके साथ आया था। वे बताती हैं कि भारत में प्रवेश के दो साल बाद तक हर रक्षा बंधन पर भाई परमानंद को राखी बांधती थीं, लेकिन तीसरे साल भाई दुनिया से चला गया। अब जो भाई पाकिस्तान में रह रहे हैं, वो यहां आना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 6 सालों से अपने दो भाइयों को राखी नहीं बाँध पाई हूं, जो अभी पाकिस्तान में हैं। मेरे भाई रामचंद ने इस रक्षा बंधन पर भारत आने के लिए फिर से वीजा के लिए आवेदन किया था, लेकिन वीजा नहीं मिला।

केस-3
मन्थरी ने सात बरस से भाई को राखी नहीं बांधी

ये मन्थरी हैं। इनका परिवार 7 साल पहले पाकिस्तान से भारत आया हे। मन्थरी ने पत्रिका को बताया- मेरा एक भाई है जिसका नाम समरथाराम है, वह जैसलमेर से लगती सीमा के उस पार सिन्ध में रहता है। मैंने पिछले 7 साल में एक बार भी अपने भाई को राखी नहीं बंधी और इस बार भी मैं अपने भाई को राखी नहीं बांध पाऊंगी।

केस-4
विजेश और मांगीलाल की कलाइयों को देवी का इंतजार

देवी ने बताया कि वे 15 साल पहले पाकिस्तान से भारत आई हैं। कहती हैं- मेरे दो भाई हैं, एक का नाम विजेश है और दूसरे का नाम मांगीलाल है। दोनों पाकिस्तान में रहते हैं। भारत आने के बाद मैंने एक बार भी अपने भाइयों को राखी नहीं बंाधी। मुझे अपने भाई बहुत याद आते हैं।

केस-5
बीस बरस से बहनों से नहीं मिल पाए सोना

बीस साल पहले भारत आए सोनाराम ने पत्रिका से मुलाकात में कहा- मेरी 4 बहनें पाकिस्तान में रहती हैं। बीस साल में एक बार भी मेरी बहनों से नहीं मिल पाया और ना ही वो मुझे राखी बांध पाई हैं। मुझे अपना बचपना याद आता है, जब रक्षाबंधन के दिन हर हाल में ननिहाल से मेरी माता मुझे वापस गाँव बुलाती थी कि बेटा राखी कि दिन राखी जरूर बंधवानी चाहिए।


एक्सपर्ट कमेंट

रिश्तों का बंटवारा बहुत बड़ी त्रासदी
सीमा के बीच रिश्तों का बंटवारा विस्थापन जिंदगी की एक बहुत बड़ी त्रासदी है। बंटवारे को 70 सालों से अधिक समय गुजरने के बावजूद विस्थापित परिवारों के बंटवारे का दर्द अभी तक सरकारों के समझ नहीं आया है। अभी भी वीजा पालिसी ऐसी है कि सालों साल लोग वीजा के लिए अप्लाई करते रहते हैं, लेकिन वीजा नहीं मिलता।

-हिंदूसिंह सोढ़ा
अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन

जोधपुर





from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2MPLonu
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment