विकास चौधरी/जोधपुर. किसानों को लहसुन की पैदावार का उचित मूल्य दिलाने के लिए मथानिया व जोधपुर मण्डी के खरीद केन्द्रों पर बड़ा घोटाला होने का मामला सामने आया है। जोधपुर जिले में उत्पादित लहसुन की बजाय कोटा व मध्यप्रदेश का लहसुन इन केन्द्रों पर बेचा गया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि लहसुन बेचने वाले किसान नहीं बल्कि अधिकांश व्यापारी ही थे। जिन्होंने मिलीभगत से किसानों के खातेदारी व गिरदावरी पर सहमति पत्र से टोकन प्राप्त किए और लहसुन बेचकर किसानों को मिलने वाली राशि हजम कर ली। इस घोटाले के संबंध में शिकायत मिलने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच शुरू की है।
मथानिया निवासी श्यामलाल पुत्र मांगीलाल गहलोत ने लहसुन खरीद केन्द्रों पर घोटाले के संबंध में एसीबी में परिवाद दर्ज कराया है। आरोप है कि किसानों को लहसुन का उचित मूल्य दिलाने के लिए जोधपुर के मथानिया व जोधपुर कृषि मण्डी में खरीद केन्द्र खोले गए थे। जहां जिले के किसानों से उत्पादित लहसुन की ही खरीद होनी थी, लेकिन इसका फायदा किसानों की बजाय व्यापारियों ने उठाया।
उन्होंने कोटा व मध्यप्रदेश के किसानों से सस्ते दामों पर लहसुन खरीदा और जोधपुर के खरीद केन्द्रों पर लाकर तीन-चार गुना दर से बेचकर लाखों रुपए बटोर लिए। इसके लिए व्यापारियों ने किसानों से खातेदारी व गिरदावरी पर फर्जी सहमति पत्र लेकर टोकन प्राप्त कर लहसुन बेचा। जबकि केन्द्रों पर किसानों से ही लहसुन खरीदा जाना था। इन केन्द्रों से तीस जून तक लहसुन की खरीदारी हुई थी। श्यामलाल की शिकायत में राजफैड के अधिकारी, क्रय-विक्रय समिति के कर्मचारी, पटवारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्ट मालिक आदि पर मिलीभगत का आरोप है। एसीबी ने परिवाद दर्ज कर जांच शुरू की है।
लहसुन की जांच में सामने आ जाएगा फर्क
श्यामलाल का कहना है कि खरीद केन्द्रों पर घोटाले में पटवारियों ने गलत गिरदावरियां देकर सहयोग किया था। लहसुन की जांच में स्पष्ट हो जाएगा है कि वो किस क्षेत्र में उत्पादित है। भौतिक रूप से देखने पर भी लहसुन जोधपुर जिले की पैदावार नहीं लगता।
चल रही है जांच
‘लहसुन खरीद केन्द्रों में घोटाले की शिकायत मिली है। परिवाद दर्ज कर जांच की जा रही है। संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।’
विष्णु कांत, पुलिस अधीक्षक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जोधपुर
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