जोधपुर. व्रत-उपवास में फलाहार के रूप में खाया जाने वाला राजगिरा पौष्टिकता के मामले में गेहूं-चावल सहित अन्य अनाजों से दमदार है। राजगिरा की तुलना में गेहूं व चावल में प्रोटीन, कैल्शियम, वसा व आयरन की मात्रा कम है। इसे अनाज नहीं मानकर फलाहार की श्रेणी में रखा गया है। इसकी खीर, हलवा, कढ़ी, चक्की, बर्फी व पराठा आदि बनाए जाते हैं। राजगिरे को रामदाना, चौलाई भी कहा जाता है। अंग्रेजी में ऐमरंथ ग्रेन कहा जाता है। इसमें दूध के मुकाबले दुगुना कैल्शियम होता है। यह ब्लड कोलेस्ट्रॉल रोकने में मददगार होता है। साथ ही बहुत पौष्टिक भी होता है।
कृषि विवि में उन्नत किस्में विकसित
मण्डोर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में केन्द्र सरकार के प्रोजेक्ट के तहत रिसर्च कर राजगिरा की उन्नत किस्में तैयार की जा रही हैं। उन्नत किस्म आरएमए-4 व आरएमए-7 पर सफल प्रयोग किया गया है। अन्य किस्मों पर भी कार्य चल रहा है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी व वैज्ञानिक डॉ. एमएल मेहरिया के अनुसार बढ़ते तापमान व जलवायु परिवर्तन के कारण रबी की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। अपने विशेष गुणों व सूखा सहन करने की क्षमता के राजगिरा की उत्पादकता पर बढ़ते तापमान का विपरीत प्रभाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
राज्य में 700 हैक्टेयर में खेती
यह मुख्यत: उत्तर-पश्चिमी हिमालय क्षेत्र की फसल है, लेकिन अब देशों के कई भागों में बोया जाता है। राजस्थान में करीब 700 हैक्टेयर भूमि में इसकी खेती की जाती है। इनमें जालोर व सिरोही क्षेत्र प्रमुख हैं। डीसा (गुजरात) में राजगिरे की बड़ी मंडी है। सिद्धपुर में भी राजगिरा बहुतायत में होता है। यह आटे व दाने के रूप में पकाया जाता है। वजन में हल्का होता है।
राजगिरा, गेहूं व चावल में पोषक तत्वों की तुलनात्मक स्थिति
पोषक तत्व----- राजगिरा---- गेहूं----चावल
प्रोटीन (ग्राम/100 ग्राम)------ 15.6------ 11.8----- 6.8
वसा (ग्राम/100 ग्राम)----- 6.3------ 1.5------ 0.5
ऊर्जा (किलो/ कैलोरी)------- 410---------- 346----- 345
कैल्शियम (मि.ग्रा./100 ग्राम)--- 222------41----10
लाइसिन (ग्रा./100 ग्राम प्रोटीन)-- 5.5------2.9----3.7
आयरन (मि.ग्रा./100 ग्राम)---- 13.9---- 3.5----1.8
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