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कमजोर मानसून ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पानी की उपलब्धता के सारे समीकरण गड़बड़ा दिए है। दस वर्ष पश्चात हालात एक बार फिर से इतने बदतर हो गए है। नहर में पानी के मुख्य स्रोत पंजाब-हिमाचल के बांधों में कम पानी के कारण नहरी क्षेत्र को चार समूह में बांट कर एक समूह चलाया जा रहा है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए 33 दिन के अंतराल से पानी मिल रहा है। नहर के अंतिम छोर पर जैसलमेर में 600 क्यूसेक के स्थान पर महज 50 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है। ऐसे में जब पीने को ही पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
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