फरसाराम मूक-बधिर पर मूक पशुओं की पीड़ा सुन लेते हैं, इलाज कर 50 की जान बचाई

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निकटवर्ती बुधनगर गांव में रहने वाले फरसाराम (26) खुद तो जन्म से ही बोल-सुन नहीं सकते, लेकिन मूक जानवरों की पीड़ा और दर्द वे आसानी से सुन-समझ लेते हैं। इस पीड़ा और दर्द का इलाज भी वे खुद ही करते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने घर पर अस्थायी रेस्क्यू सेंटर तक बना दिया है।

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