जिस सडक़ पर पहले से ही डिवाइडर अब वहां तीन करोड़ खर्च करने की तैयारी

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जोधपुर.

एक सडक़ जो पहले से फोनलेन है। सुव्यवस्थित डिवाइडर और बीच में हरियाली भी है। अन्य सडक़ों के लिए जो आदर्श साबित होती है। उसी सडक़ से जोधपुर विकास प्राधिकरण संतुष्ट नहीं है। अब डिवाइडर पर लगी इसी रैलिंग को उखाड़ कर हेरिटेज लुक देने के नाम पर ३ करोड़ खर्च करने की तैयारी की जा रही है। जबकि दूसरी ओर अधूरे पड़े नालों के निर्माण पर जेडीए कोष नहीं होने की दुहाई दे रहा है।

जोधपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से लेकर सर्किल हाउस तक की सडक़ जो कि पहले ही चौड़ी और व्यवस्थित डिवाइडर वाली है उस पर जेडीए अब तीन करोड़ से अधिक की राशि लगाने की तैयारी पूरी कर चुका है। एयरपोर्ट से सर्किट हाउस तक आने वाले वीआईपी लोगों को ध्यान में रख कर हेरिटेज लुक देने के लिए इतनी बड़ी राशि लगाई जा रही है। जबकि दूसरी ओर भैरव नाले सहित अन्य नालों का निर्माण अधूरा पड़ा है और जेडीए न्यायालय में कोष की कमी होने की दुहाई भी दे चुका है।

एक नजर में कार्य

- ४ किलोमीटर है करीब सडक़ की लम्बाई

- ३ करोड़ २ लाख खर्च करेगा यहां डिवाइडर को सुधारने में

- ३ चौराहे आते हैं इस सडक़ के बीच में

- १८ माह में पूरा करना है काम

पहले से डिवाइडर और हरियाली ठीक
- सर्किट हाउस चौराहे से भाटी चौराहे तक डिवाइडर बना हुआ है और रैलिंग भी लगी हुई है। इसके बीच में पौधरोपण भी हो रखा है। तकनीकी दृष्टि से यह सडक़ खराब नहीं कही जा सकी।
- भाटी चौराहे से पांच बत्ती चौराहे पर करीब ३०० मीटर सडक़ के बीच डिवाइडर पर सुरक्षा रैलिंग व पौधरोपण नहीं है। इसके आगे यहां भी व्यवस्थित डिवाइडर व हरियाली है।
- पांच बत्ती सर्किल से एयरपोर्ट रोड भी डिवाइडर और हरियाली से लिहाज से क्षतिग्रस्त नहीं है। दुहाई रैलिंग टूटने की
इस करीब चार किलोमीटर सडक़ के बीच डिवाइडर पर लगी रैलिंग के बार-बार टूटने की दुहाई देकर यह राशि खर्च की जाएगी। रैलिंग हटा पत्थर के ब्लॉक व अन्य कार्य में जनता की गाढ़ी कमाई के बजट को लेपा जाएगा।

वीआईपी सडक़ पर दिखावे के लिए काम

वीआईपी आवागमन में सर्वाधिक उपयोग एयरपोर्ट से सर्किट हाउस तक की सडक़ का किया जाता है। इसे हेरिटेज लुक देने के पीछे मंशा भी वीआईपी लोगों को सबकुछ अच्छा दिखाना है। जबकि दूसरी ओर शहर में आवश्यकता वाले कई कार्यों को नजरंदाज किया जा रहा है।
इनका कहना...
डिवाइडर नहीं सिर्फ रैलिंग हटा रहे हैं। एक्सीडेंट या अन्य कारणों से रैलिंग बार-बार टूटती है। इसी कारण इसे बदला जा रहा है, जिससे कि मजबूत डिवाइडर का रूप दिया जा सके।
- दुर्गेश बिस्सा, आयुक्त, जोधपुर विकास प्राधिकरण।



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