जोधपुर की पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन

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जोधपुर.

जोधपुर की पूर्व सांसद व पूर्व राजमाता कृष्णा कुमारी की पार्थिव देह को मंगलवार शाम जसवंत थड़ा परिसर में वेद मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच अंतिम विदाई दी गई। उम्मेद भवन से फूलों से सजी गाड़ी में रखी उनकी पार्थिव देह के अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। राजमाता जिन्दाबाद के नारों के बीच पूर्व राजमाता के पुत्र पूर्व सांसद गजसिंह ने मुखाग्नि दी तो हर आंख नम हो उठी। जब तक सूरज चांद रहेगा..कृष्णाकुमारी का नाम रहेगा.. के बीच उनकी पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हुई।

कृष्णा कुमारी को पक्षाघात के बाद रेजीडेन्सी रोड स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सोमवार देर रात करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। राजमाता के निधन का समाचार मिलते ही समूचे मारवाड़ में शोक की लहर छा गई। उनकी पार्थिव देह को उम्मेद भवन के मारवाड़ दरबार हॉल में आमजन के दशर्नाथ रखा गया। पार्थिव देह पर पुष्पांजलि देने के लिए लंबी कतारे लगी रही। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत, केंद्रीय विधि, न्याय एवं कॉर्पोरेट राज्य मंत्री पीपी चौधरी, राज्य के वनमंत्री गजेन्द्रसिंह खींवसर, परिवहन मंत्री युनूस खान सहित कई जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने पूर्व राजमाता की पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित की।

 

सम्मान में झुका ध्वज, थमे मंगल वाद्य
पूर्व राजमाता के निधन के बाद मेहरानगढ़ व उम्मेद भवन में फहराए जाने वाले पचरंगी ध्वज को झुका दिया गया। मेहरानगढ़ में गूंजने वाले मंगल वाद्य नौपत व शहनाई को बंद कर दिया गया। मंदिर के कपाट भी दर्शनार्थियों के लिए बंद कर दिए गए।

 

जीवन में पांच पीढिय़ों के साथ देखे उतार-चढ़ाव
पूर्व राजमाता कृष्णाकुमारी को अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव के बीच पांच पीढिय़ों को देखने का अवसर मिला। काठियावाड़ गुजरात की ध्रागध्रा रियासत की राजकुमारी कृष्णाकुमारी का विवाह जोधपुर नरेश महाराजा हनुवन्तसिंह के साथ 1943 ई. में हुआ। केवल 24 वर्ष की उम्र में 26 जनवरी, 1952 को उनके पति महाराजा हनवंत सिंह का हवाई दुर्घटना में देहान्त हो गया। उस समय गजसिंह केवल चार वर्ष के थे। उनके कंधों पर जिम्मेवारियों का बोझ आ पड़ा, जिन्हें उन्होने बड़े साहस व धैर्य के साथ संभाला।

 

जोधपुर की सांसद रही
1971 ई. में जोधपुर से सांसद चुनी गई और कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उन्होने संसद में उठाया। कन्या शिक्षा को उन्होंने प्राथमिकता दी। उसके लिए देसूरी पाली में गरीब छात्राओं के रहने के लिए छात्रावास एवं विद्यालय की व्यवस्था की। 'हनुवन्त एजुकेशनल ट्रस्ट' के माध्यम से राईकाबाग में विधवा स्त्रियों एवं जरूरतमंद महिलाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र खोला गया। जोधपुर में कन्याओं की उच्च शिक्षा के लिए 'राजमाता कृष्णाकुमारी गल्र्स स्कूल' खोला गया।

 

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