भोपालगढ़. आमतौर पर अपने किसी परिचित अथवा परिजन की मौत पर उनके पुत्र अथवा अन्य रिश्तेदार तो अस्थियां विसर्जन के लिए हरिद्वार जाने पर या शवयात्रा के समय मुंडन करवाते हैं, लेकिन भोपालगढ़ क्षेत्र में संभवत पहली बार दो पोतियों ने अपने दादा के निधन पर हरिद्वार में अस्थियां विसर्जन के समय जिद कर मुंडन भी करवाया।
हुआ यूं कि भोपालगढ़ क्षेत्र के कागल गांव निवासी समाजसेवी रामदयाल डूडी के पिताजी भींयाराम डूडी का पिछले दिनों निधन हो गया था। जिस पर रामदयाल डूडी अपने पिता की अस्थियां लेकर हरिद्वार गंगा विसर्जन के लिए रवाना हुए। तो उनके साथ उनकी पुत्रियां एवं दिवंगत भींयाराम की पोतियां कृतिका और लविश भी उनके साथ रवाना हो गई। वहां पहुंचकर इन्होंने अपने पिता रामदयाल डूडी के साथ सभी रस्में निभाई और अपने दादा की अस्थियां विधिविधानपूर्वक गंगा में विसर्जित की। जिद कर मुंडन करवाया
गंगा में अपने पिता की अस्थियां विसर्जन के बाद जब रामदयाल डूडी ने हिंदू परंपरा के अनुसार अपना सिर मुंडन करवाया, तो उनके साथ मौजूद उनकी पुत्रियों ने भी इसका कारण पूछा। जवाब में जब रामदयाल ने पुत्री कृतिका व लविश को बताया कि यह हिंदू परंपरा और रिवाज का ही एक हिस्सा है तथा इससे दिवंगत आत्मा को शांति के साथ ही हमें भी पुण्य प्राप्त होता है। इतना सुनते ही रामदयाल की दोनों पुत्रियां भी मुंडन करवाने की जिद करने लगी। अपने बालों को लेकर काफी संजीदा रहने वाली इन दोनों बेटियों को मुंडन करवाने का जिद करते देख रामदयाल ने इन्हें मनाने का प्रयास किया। लेकिन यह नहीं मानी और इन्होंने आखिरकार उन्होंने मुंडन करवाकर समाज को एक अनूठा संदेश दिया है। उनका कहना है कि अक्सर किसी परिजन की मौत पर सारे क्रियाकर्म अथवा सामाजिक रस्में पुरुष ही निभाते हैं। ऐसे में हम लड़कियों को भी समाज की मुख्यधारा के समकक्ष आकर कार्य करने चाहिए।
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