जोधपुर. जोधपुर में हैण्डीक्राफ्ट की करीब 80 प्रतिशत इकाइयां नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को धत्ता बता बिना एनओसी संचालित हो रही हैं। एनजीटी के आदेशानुसार औद्योगिक इकाइयों के संचालन के लिए एनओसी लेना जरूरी है। इनमें हैण्डीक्राफ्ट, स्टील, टैक्सटाइल, इंजीनियरिंग इकाइयां भी शामिल हैं। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की ओर से ऐसी इकाइयों को नोटिस भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। सख्त कार्यवाही नहीं होने के कारण करीब कई इकाइयां बिना एनओसी संचालित हो रही हैं। बोर्ड की ओर से इस वर्ष के शुरुआती महिनों में नोटिस भेजे गए। इससे पूर्व वर्ष 2010, 2012 में भी नोटिस भेजे गए थे। इसके बाद भी हाल जस के तस हैं। टेक्सटाइल व स्टील की भी कई इकाइयां बिना एनओसी चल रही हैं। इनके अलावा पाली रोड पर कई फैक्ट्रियां कृषि भूमि पर चल रही हैं।
हालांकि हैण्डीक्राफ्ट उद्योग को बाकी उद्योगों की तुलना में कम प्रदूषित उद्योगों की श्रेणी में रखा गया है। जबकि टेक्सटाईल व स्टील उद्योग को सर्वाधिक प्रदूषित उद्योगों में सम्मिलित किया गया है। जिन हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों में सीजनिंग प्लांट लगे हैं उन्हें मध्यम श्रेणी इकाइयों में शामिल किया गया है। इस समय करीब 150 इकाइयां सीजनिंग का काम कर रही हैं। ऐसी इकाइयों से कम मात्रा में, लेकिन बिना उपचार के हानिकारक श्रेणी के रासायनिक अपशिष्टों का निस्तारण किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि हेजार्डियस वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स में शामिल अपशिष्टों में वुड सीजनिंग प्लांट से निकले अपशिष्ट भी शामिल हैं। स्टील-टैक्सटाइल इकाइयों से निकलने वाले सलफ्यूरिक, नाइट्रोजन एसिड, हाइड्रोफ्लोरिक जैसे रसायनों से भी उच्च स्तरीय प्रदूषण बढ़ रहा है ।
फिर देंगे नोटिस
बिना एनओसी संचालित हैण्डीक्राफ्ट सहित अन्य इकाइयों को फिर नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद भी एनओसी नहीं लेने पर मुख्यालय को इन इकाइयों की सूची भेजकर कार्यवाही की संस्तुति की जाएगी।
विजयकुमार शर्म, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जोधपुर
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