वाहनों का चालान काटने वाले पुलिसकर्मी खुद ही नहीं लगाते हेलमेट, अब डीजीपी ने निकाले ये आदेश

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विकास चौधरी/जोधपुर. सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अकाल मौत के पीछे चारपहिया वाहन चालकों के सीटबैल्ट न लगाने, दुपहिया वाहन चालक व सह यात्री के हेलमेट नहीं लगाने और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें करना प्रमुख कारण हैं। वर्ष 2017 में करीब दो हजार व्यक्तियों की मौत दुपहिया वाहनों की दुर्घटनाओं से हुई। इनमें पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि अधिकतर पुलिसकर्मी मोटरसाइकिल पर आने-जाने के दौरान हेलमेट नहीं लगाए हुए थे, अथवा रात्रि में रिफ्लेक्टर जैकेट लगाकर ड्यूटी नहीं कर रहे थे। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी गल्होत्रा की ओर से जारी आदेश का यही सार है। सड़क हादसों में कमी लाने की कवायद के तहत डीजीपी ने राज्य के सभी एडीजी, जयपुर व जोधपुर के पुलिस आयुक्त, रेंज आईजी व जिलों के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर सभी पुलिसकर्मियों को यातायात के नियमों की पालना कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

 

एक साल में दो हजार मौत दुपहिया वाहन से

 

राज्य में वर्ष 2017 में सड़क हादसों में जितने लोग मौत का शिकार हुए, उनमें से दो हजार व्यक्ति दुपहिया वाहनों पर सवार थे। इनके पीछे सबसे बड़ा कारण बगैर हेलमेट दुपहिया वाहन चलाना रहा है।

हेलमेट व सीट बैल्ट लगाकर निकलें

 

डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी पुलिसकर्मी या उसका सहयात्री घर या कार्यालय से दुपहिया वाहन पर आते-जाते समय हेलमेट आवश्यक रूप से लगाएं। ग्रामीण क्षेत्रों के पुलिसकर्मियों पर विशेष नजर रखी जाएं। इसकी कड़ाई से पालना की जाए।

उल्लंघन पर कार्रवाई होगी


इस सम्बन्ध में पुलिस महानिदेशक की ओर से आदेश मिले हैं। जिसे सभी अधीनस्थ अधिकारियों व जवानों को भेजकर पालना करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र में शिकायतें अधिक मिलती हैं। उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एमवी एक्ट में कार्रवाई की जाएगी।

राजन दुष्यंत, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जोधपुर

हादसों के प्रमुख कारण

 

- बगैर हेलमेट दुपहिया वाहन चलाना।

- वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग।

- नशे में वाहन चलाना।

- गलत दिशा से ओवरटेकिंग करना।

- तेज रफ्तार।

- एकाग्रचित होकर वाहन न चलाना।

 

राज्य में सड़क हादसे व मौतों पर एक नजर

वर्ष------कुल हादसे ----मृत्यु

2009 .....25114 .......9045

2010...... 24302 ......9163

2011...... 23245 ......9232

2012...... 22969 .....9528

2013 .....23592 .....9724

2014 ......24628 ....10289

2015 .....24072 .....10510

2016 ........23066 ......10464



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