कुणाल पुरोहित/जोधपुर. झोलाछाप डॉक्टरों और नीम हकीमों पर कार्रवाई को लेकर चिकित्सा विभाग गंभीर नहीं है। विभाग ने साढ़े 5 सालों में महज 18 नीम हकीमों और झोला छाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की है। इसमें सबसे ज्यादा साल 2014 में 9 झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई। जबकि चिकित्सा विभाग में लगातार झोलाछाप डॉक्टरों और नीम हकीमों को लेकर शिकायतें होती रहती है।
कमजोर कार्रवाई
साल दर साल झोलाछाप डॉक्टरों में नीम हकीमों पर कार्रवाई के आंकड़ों में आ रही गिरावट बीसीएमओ स्तर पर हो रही कमजोर कार्रवाई का नतीजा है। ऐसा नहीं है कि ग्रामीण क्षेत्रों में झोला छाप डॉक्टरों से मुक्त हो गए हो, इसकी अभी भी सीएमएचओ के पास लगातार शिकायतें आ रही है। लेकिन फि र भी चिकित्सा विभाग इसे नजरअंदाज करके बैठा है। सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़े गए नीम हकीम मामला दर्ज होने के बाद भी धड़ल्ले से मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
यूं हुई साल दर साल कार्रवाई
चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार नीम हकीमों व झोलाछाप डॉक्टरों पर साल 2013 में 2, 2014 में 9, 2015 में 3, 2016 में 1, 2017 में 2 में और इस साल केवल एक कार्रवाई हुई है।
18 में से 7 कार्रवाई जोधपुर शहर में
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने साढ़े पांच साल में 18 कार्रवाई की है। इनमें अकेले लगभग 7 कार्रवाई जोधपुर शहर में हुई हैं। इनमें तीन क्लीनिक पर कार्रवाई का नाम ही दर्शित नहीं है।
राज्य स्तरीय टीम के भरोसे स्थानीय टीम
जानकारों की माने तो पीसीपीएनडीटी की तर्ज पर झोला छाप डॉक्टरों और नीम हकीम पर कार्रवाई करने के लिए राज्य स्तरीय टीम का गठन किया गया है। शिकायत मिलने पर वहीं से टीम कार्रवाई करने आएगी। लेकिन वह भी जब चिकित्सा विभाग की टीम उनको झोला छाप डॉक्टरों और नीम हकीमों के स्थानों से अवगत करवाएगी। झोलाछाप डॉक्टरों ने महीनों को पकडऩे की राज्य स्तर की यह कोशिश भी विफ ल साबित हो रही है। और न जाने कितने मरीजों के साथ होगा खिलवाड़शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर हो रही झोला छाप डॉक्टरों व नीम हकीमों पर कार्रवाई से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
दस्तावेज वेरीफि केशन में अटक जाता है काम
झोलाछाप डॉक्टरों को नीम हकीम पर कार्रवाई के बाद उनके दस्तावेज वेरीफ ाई होने के लिए चिकित्सा विभाग भेज दिए जाते हैं। लेकिन समय पर उनके दस्तावेज वेरिफ ाई नहीं होने से उन पर कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है। ऐसा ही एक ताजा उदाहरण इसी साल चिकित्सा विभाग की ओर से फ रवरी महीने में हुई कार्रवाई के दौरान सामने आया। इसमें सीएमएचओ की टीम ने कार्रवाई कर होम्योपैथिक चिकित्सक के दस्तावेज जब्त कर उन्हें जांच के लिए जयपुर स्थित चिकित्सा विभाग भेजा। जो साढ़े पांच महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक वेरिफ ाई होकर नहीं आए हैं। इसको लेकर सीएमएचओ का कहना है कि उनके यहां से कार्रवाई के दौरान दवाइयां नहीं मिली थी।
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