117 पाक विस्थापितों को मिली भारतीय नागरिकता, बोले- पाकिस्तान में धन और बहन-बेटियां कोई सुरक्षित नहीं

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जोधपुर। कोई साल 2009 में जोधपुर आकर बसा, तो कोई साल 2001 से भारतीय नागरिकता का इंतजार कर रहा है। ताकि नागरिकता लेकर धर्म निरपेक्ष देश में खुद के धर्म का पालन कर सके। जिला प्रशासन की ओर से रविवार को टाउन हॉल में 15-20 साल से जोधपुर में रहने वाले 117 पाक विस्थापितों को नागरिकता का प्रमाण-पत्र दिया गया।

इस खुशी के अवसर पर कइयों ने हाथ जोड़कर और किसी ने घुटने के बल बैठ अपनी खुशी का इजहार किया। कार्यक्रम में पाक विस्थापितों को नागरिकता प्रमाण जिला कलक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने दिए।

पाक विस्थापितों ने कहा कि पाकिस्तान में हिन्दूओं का धन और बहन-बेटियां दोनों ही सुरक्षित नहीं हैं। जोधपुर में सऩ् 2005 में साढ़े पांच हजार पाक विस्थापितों को नागरिकता प्रदान की गई थी। बीते 18 माह से अभी तक 233 पाकिस्तान के नागरिकों को भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है।

जबकि बीते 18 माह में कार्यालय स्तर पर 116 लोगों को नागरिकता प्रदान की गई हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान से किया गया। वहीं सोमवार को जिन दंपतियों को नागरिकता मिल चुकी हैं, उनकी संतान आवेदन करेगी।

विस्थापितों ने सुनाए दुखड़े
शिविर में भारतीय नागरिकता लेने आए जोगीराम ने बताया कि पाकिस्तान में उनकी बहन-बेटियां तक सुरक्षित नहीं थी। धन भी छिना जाता था। बार-बार दबाव बनाया जाता था कि धर्म बदलो। कुराण-मस्जिद का अध्ययन करो। वे साल 2009 में जोधपुर आकर बस गए थे। जोधपुर में एसी रिपेयरिंग का कार्य कर रहे टिकमदास ने बताया कि वे 18 साल पहले पाकिस्तान से आए थे। उनका पूरा परिवार जोधपुर में हैं।

हीराराम कुमावत ने बताया कि पाकिस्तान में उनकी बिरादरी का कोई नहीं था। इसी कारण यहां आए। पाकिस्तान में उनकी किराणे की दुकान थी, जिसे बेचकर वे भारत आ गए। उन्होंने बताया कि हिन्दुस्तान में जितने आराम से मुस्लिम भाई-बहन रहते हैं, उतने ही मुश्किल से हिन्दू पाकिस्तान में रहते हैं।

इस प्रक्रिया से गुजरे नागरिकता के लिए नागरिकता के लिए 18 साल से कम उम्र के पाक विस्थापितों को 51 (डी) और इससे ज्यादा उम्र को 51 (ई) के फार्म भरवाए जाते है। जिन लोगों को भारत में नागरिकता मिलती है उनकी नागरिकता पाकिस्तान में स्वत: ही खत्म हो जाती है।

जिन्हें नहीं मिली है वे पाकिस्तान के नागरिक है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले रिपोर्ट स्थानीय आईबी अपने मुख्यालय जयपुर को सूचना भेजता है। जयपुर मुख्यालय केन्द्रीय आईबी को रिपोर्ट करता है। इसके बाद केन्द्रीय आईबी भारत सरकार गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करता है। गृह मंत्रालय सीधा राज्य सरकार को रिपोर्ट करता है। बाद में राज्य सरकार कलक्टर को रिपोर्ट करती है।

जटिल प्रक्रिया जरूरी: जिला कलक्टर
कार्यक्रम के दौरान जिला कलक्टर डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने कहा कि देश की नागरिकता के लिए जटिल प्रक्रिया बेहद जरूरी है। इस तरह के कैंप बाकी लोगों के लिए आशा की किरण होते है। उन्होंने कैंप को सफल बनाने के लिए सभी का आभार जताया।

प्रक्रिया बहुत धीमी है
अभी तक 6 हजार लोगों को नागरिकता मिलनी शेष है। आईबी की रिपोर्ट और लांग टर्म वीजा के एक्सटेंशन में सर्वाधिक विलंब होता है। प्रक्रिया जटिल होने के कारण पाक विस्थापितों का समय पर काम नहीं होता है।

फिर ये लोग घूसखोरी जैसा रास्ता अख्तियार करते है। आईबी लांग टर्म वीजा की रिपोर्ट कलक्टर को दे तो काम और सरल हो जाएगा। हिन्दूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन

घुटने के बल बैठ हाथ जोड़े
कुड़ी भगतासनी निवासी प्रीतमदास ने घुटने के बल बैठ जिला कलक्टर व अन्य लोगों को हाथ जोड़े। उन्होंने कहा कि वे 2006 में भारत आए थे। आज उनको धरती ने अपना बना लिया। इसलिए वे बहुत खुश हैं। कार्यक्रम में 12 वर्षीय मुनिश को भी नागरिकता दी गई।



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