जीएसटी की तरह कश्मीर पर एक क्यों नहीं होते राजनीतिक दल। कश्मीर के हालात नहीं सुधरे तो देश के हालात बिगड़ेंगे।

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Dangiyawas
नाथूराम डांगी की कलम से
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4 अगस्त को हमारे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवादियों के उपज वाले पाकिस्तान में जाकर कहा कि आतंकवादियों का महिमा मंडन नहीं होना चाहिए। आतंकवादी तो आतंकवादी ही होता है। भले ही राजनाथ सिंह ने यह बात पाकिस्तान में कही हो, लेकिन इस बात को हमारे देश के राजनीतिक दलों को समझने की ज्यादा जरूरत है, क्योंकि पाकिस्तान से भी ज्यादा हमारे देश के राजनीतिक दलों के नेता आतंकवादियों के हिमायती बने हुए है। यही वजह है कि एक माह से भी ज्यादा समय से कश्मीर में कफ्र्यू जैसे हालात बने हुए हंै। 3 अगस्त को राज्यसभा में जीएसटी बिल को पास करवाने में जिस प्रकार राजनीतिक दलों ने अभूतपूर्व एकता दिखाई, उसी प्रकार कश्मीर के मुद्दे पर भी हमारे राजनीतिक दलों को एकता दिखानी होगी। राजनीतिक दलों के नेता यह अच्छी तरह समझ लें कि यदि कश्मीर के हालात नहीं सुधारे गए तो फिर पूरे देश के हालात बिगड़ जाएंगे और फिर जीएसटी जैसे बिल बेमानी हो जाएंगे। जीएसटी बिल को पास करवाने में केन्द्र की भाजपा सरकार ने जो रणनीति बनाई, उसी के अनुरुप कश्मीर मुद्दे पर भी रणनीति बनानी होगी। आतंकी बुरहान बानी की मौत का मुद्दा हाफिज सईद ही नहीं उठा रहा बल्कि हमारे देश के राजनीतिक दलों के नेता भी उठा रहे हंै। जिस बुरहान बानी पर सुरक्षा बलों के जवानों की हत्याओं के आरोप हैं, उस आतंकी को युवाओं का हीरो बताया जा रहा है। बानी की मौत के बाद से ही कश्मीर घाटी में सन्नाटा पसरा पड़ा है। जो लोग जीएसटी बिल के पास हो जाने से खुश हो रहे हैं वह यह भी बताएं कि कश्मीर के हालात कैसे है? ऐसा नहीं हो सकता कि कश्मीर के हालातों की वजह से देश भर के हालात बिगड़ते रहे और हम जीएसटी का जश्न मनाते रहें। भारत की एकता और अखंडता बनी रहेगी तभी तो जीएसटी का जश्न मनाया जा सकता है। आज सरकार की हालात इतनी खराब है कि जो लोग आतंकी बुरहान बानी का समर्थन कर रहे है उनके खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं है। नरेन्द्र मोदी जैसे नेताओं का यह सोचना है कि सबका साथ और सबका विकास के नारे से समस्याओं का समाधान हो जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि कश्मीर की समस्या का समाधान होने पर ही देश की एकता और अखंडता बनी रहेगी।

साभार : नाथूराम डांगी

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