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बदमाशों ने एक महीने रैकी की, बच्चे को उड़ाने दूसरे जिले में रजिस्टर्ड कार किराए पर मंगवाई
जोधपुर. बनाड़ थाना क्षेत्र से अपहृत बालक भूपेंद्र के मिलने के बाद चल रही पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि बच्चे के अपहरण की योजना उसके घर के पास ही बनी थी। बदमाशों ने इसके लिए रैकी कर तैयारी की थी। इसके लिए दूसरे जिले में रजिस्टर्ड कार किराए पर ली थी।
सुबह से शाम तक के लिए इसके किराए के लिए माेटी रकम चुकाई गई। अपहरण के बाद कार लौटा दी गई। हालांकि पुलिस ने अभी अाधिकारिक रूप से इस मामले में कोई खुलासा नहीं किया है, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार घर के आसपास रहने वाले कुछ परिचितों के साथ अन्य लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, वे इस परिवार को अच्छी तरह से जानते हैं। इसको लेकर पुलिस दो संदिग्धों से लगातार पूछताछ कर रही है। इसके अलावा भूपेंद्र के घर के पास बैठने वाले कुछ लोगों के गायब होने के कारण उन पर भी संदेह है। पुलिस बुधवार को इस मामले का पूरा खुलासा करेगी। मामले में पांच-छह आरोपी हो सकते हैं।
संदिग्ध से पूछताछ के चलते बदमाशों पर बना दबाव
पुलिस ने सोमवार को बलराम नगर क्षेत्र से एक युवक को पूछताछ के लिए थाने में बुलाया था। युवक भूपेंद्र के घर के नजदीक ही रहता है। उससे पूछताछ में कई जानकारियां मिलीं। इसके बाद पुलिस ने शिकंजा कसा तो बदमाश भूपेंद्र को रात करीब 11 बजे बावड़ी में मोतीराम सांखला की होटल के पास छोड़ कर भाग गए। जिस युवक को पुलिस ने बुलाया था, उससे पूछताछ के बाद से ही पुलिस को इस मामले के राज की जानकारी मिलने लगी थी। ऐसे में माना यह भी जा रहा है कि बदमाशों के साथी अपहरण के बाद भी क्षेत्र में पुलिस के हर कदम पर नजर रख रहे थे। ज्योंही दबाव की स्थिति बनी तो भूपेंद्र को बावड़ी में छोड़ दिया गया।
छोड़ने से पहले कहा- पापा के पास ले जा रहे हैं
भूपेंद्र ने बताया कि गत शनिवार सुबह एक स्विफ्ट कार में सवार तीन अंकल आए थे। उन्होंने बताया कि वे पापा के दोस्त हैं और उन्होंने साथ में कार खरीदी थी। जिस कमरे में उसे रखा गया था उसमें एक ही बदमाश उसके साथ रहा। गुमराह करने के लिए वे दूसरे नामों से बात करते थे। एक अंकल बाइक पर उनके लिए दाल फ्राई, सब्जी, रोटी लाते थे। सोमवार रात को अंकल ने मुझे कहा कि चलो बाहर चलते हैं, फिर बाइक पर बैठाया। मैंने पूछा कहां, तो बोले कि पापा के पास चल रहे हैं। इसके बाद होटल के पास मुझे यह कह कर छोड़ा कि पेट्रोल भरवाने जा रहे हैं। कुछ देर में वापस नहीं आए तो मैं होटल पर गया। वहां अंकल से बात कर मैंने मम्मी का फोन नंबर दिया था।
जनवरी में ही खरीद ली थी सिम| अपहरणकर्ता इस क्षेत्र से पूरी तरह से वाकिफ थे। वे भूपेंद्र के परिवार पर नजर रख रहे थे। एक माह तक भूपेंद्र के स्कूल आने-जाने के समय की रैकी की। वारदात को अंजाम देने के लिए जनवरी में सिम खरीदी गई, जिससे संदेह नहीं हो। सिम काे 2 फरवरी को एक्टिवेट किया गया, लेकिन बाद में फोन बंद कर दिया गया। भूपेंद्र का अपहरण करने के बाद फोन को शुरू कर उस सिम से कॉल कर डेढ़ करोड़ की फिरौती मांगी।
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