B-Atul Dhinda: 27 मार्च 2015, शायद यह तारीख ही थी। हर रोज की तरह इस रोज को भी ड्यूटी पर था। बाकी दिन की तरह यह दिन भी निकल रहा था। वही मोबाइल से रोज की तरह टाइम पास। दोस्तों के साथ रोज की तरह चैटिंग, शायद एक जरिया बन चुका था। मित्रों से जुड़े रहने का।www.dangiyawasnews.com
तभी फोन की घंटी बजती है तो मेरे चेहरे पर एक मुस्कान सी आ जाती है। ठीक वैसे ही जैसे मुरझाये हुए पत्तों को पानी डालने पर उन में भी खुशी फूटती होगी। फ़ोन जैसे ही अटेंड किया है उधर से एक-दम से रुंधती हुई सी आवाज आई,"सर ऐसा मेरे साथ ही क्यों हुआ"। यह वाक्य पूरा भी नहीं हुआ होगा कि दिमाग ने एक या 2 सेकंड में अनगिनत घटनाओं के बारे में सोच लिया जो घटित हो सकती है। शायद उस समय यदि मस्तिष्क की तीव्रता के बारे में गणना करने वाली मशीन होती तो वो अनगिनत सुपर कंप्यूटर से कहीं ज्यादा दिमाग की तीव्रता मापती। मेरे दिमाग द्वारा सही अनुमान ना लगा पाने के तुरंत बाद ही मैं पूछ बैठा ," क्या हुआ आज ऐसी बात क्यों कर रहे हो ?" रुंधते हुए गले से आवाज आई," सर मेरा पैर फ्रैक्चर हो गया"। इतना सुनते ही दिमाग सुन्न हो गया। ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे कानों में बर्फ ठूंस दी हो।ये शब्द इतने भारी थे की इनको किसी भी तराजू में नही तोला जा सकता था। किसी तरह से अपने आप को सामान्य करते हुए मैंने ढांढस बढ़ाया।और सकारात्मक्त सोच रखने को कहा।और आश्वाशन देते हुए कहा की जो हुआ उसे भूल जाओ बहार और स्वर्णिम अवसर आपकी राह देख रहे है। पर वह शख्स पूरी तरह से निराश लग रहा था। यह देखने के बाद मुझे भी भगवान से इर्ष्या हो उठी। उनकी आवाज को सुनकर यही लग रहा था कि यह अब कुछ नहीं कर पाएगा। क्योंकि उसने अभी नियति के आगे हार मान ली। यह किसी को नहीं पता था यह शख्स नियति को भी पलटने वाला है ।
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जी हा आज हम "पथ प्रदर्शक" में बात कर रहे हैं "ओम डांगी" की। ओम का जन्म डांगियावास में किसान परिवार में हुआ ।परिवार में सबसे छोटा होने के कारण सब घर वाले ओम को घर वालो का लाडला करना था। कहते हैं ना कि ज्यादा लाड प्यार में बच्चा पढ़ने में कमजोर व लापरवाह रह जाता है। पर ओम सा एकदम उलट थे ।वह पढ़ाई लिखाई में बाकी सब सहपाठियों की तुलना में तेज थे। परिवार वालों ने भी इनकी पढ़ाई का पूरा ख्याल रखा ।वह दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात देश की सेवा करने के सपने देखने लगे ।उनकी इसी ललक ने इन्हें सेना में अपना जीवन समर्पित करने की ठान ली ।वह सुबह शाम शारीरिक व्यायाम करने लगे तथा आसपास में होने वाली सेना की रैलियों में भाग लेने लगे। ताकी सेना में भर्ती हो जाए। उनका शारीरिक दमखम भी अच्छा था। वह दौड़ में भी हमेशा अव्वल रहते थे ।लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। शायद भगवान भी उनकी परीक्षा लेने के मूड में था। 26 मार्च 2012 को जब वह clg की परिक्षा देखकर गांव वापस लौट रहे थे तो एक सड़क दुर्घटना में उनका पैर फ्रैक्चर हो गया। और उनके सेना में जाने के अवसर पर भी ताला लग गया। अमूमन इतना कुछ होने के पश्चात हर शक्स इस तरह का कठिन कैरियर चुनने की इच्छा तो त्याग देता है ।www.dangiyawasnews.com
लेकिन ओमजी भी अपनी धुन के पक्के थे ।पैर फ्रैक्चर आने के पश्चात जैसे ही उनका प्लास्टर खुला तो उन्होंने अपने दिल में छुपी हुई निराशा रुपी अंधकार को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया ।और ओम जी ने इस बार खुद की तैयारी के साथ में अपने साथियों की शारीरिक दक्षता को सुधारने का बीड़ा उठाया । सेना की तैयारी के लिए गांव में बंजर पड़े मैदान को साफ करवाया। वहां दौड़ने के लिए ट्रैक बनवाया ।और युवा साथियों को प्रेरित किया ।अब ओमजी नियति को मार देने के लिए पहले से ज्यादा दमखम लगाने लगे लेकिन भगवान भी कभी कभी सारे रास्ते बन्द करने की ठान लेता है।ठीक ओम जी के ऊपर भी पारिवारिक दायित्व आ गया।परिवार वाले दवाब देने लगे।तो ओमजी ने अपने लिए खुद एक रास्ता बनाया। घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए एक निजी स्कूल में अध्यापन कार्य करने लगे ।तथा अन्य बच्चों को भी देश सेवा में प्रेरीत करने लगे। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इन्होंने अपना प्रयास जारी रखा। और पुलिस के कठिन शारीरिक दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् मुख्य मेरिट में जगह बनाई और पुलिस जॉइन कर ली। ओम जी की संक्षिप्त जीवनी को हमने आप लोगो के सामने प्रस्तुत की ताकि उनकी जीवनी बाकी युवावों को भी प्रेरित करेगी कि आदमी जब कुछ करने की ठान लेता है तो फिर वह पीछे मुड़कर नहीं देखता।
इन्होंने इन पंक्तियों को सच कर दिखाया
"उथल पुथल उत्ताल पथ पर लहरें डगमगयेगी
हौसला रख मुसाफिर मंजिल आएगी आएगी"।।।
इनके जज्बे को हमारा सलाम और ऐसे संघर्षशील और झुझारू व्यक्ति ही समाज के और युवाओं के सामने इस प्रकार के परिश्रम और सफलता के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।।
डांगियावास न्यूज़ कॉम का सलाम🙏
आप लोगो के आस पास भी ऐसी कोई शख्सियत है जो हम लोगो के लिए प्रेरणादायी हो तो उनके बारे में हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9814439677 पर लिख भेजे
अतुल डिंडा-9814439677
राजकुमार सिंह "आजाद"
ओम
super bhai... salute for om ji..
ReplyDeleteatul ji aap meri blog bhi jrur pdhe.
earnonlinehindime.blogspot.com
esme Internet se judi hindi me bahut mahtvpurn jankariya he.