एक बिश्नोई योद्धा की वीर गाथा....
14 दिसंबर 1971समय लगभग साढ़े दस बजे स्थान गुवाहाटी का एयरबेस विंग कमांडर बी के बिश्नोई पूर्वी पाकिस्तान में एक अभियान के बाद लौटे ही थे कि ग्रुप कैप्टन वोलेन ने उन्हें बताया कि उन्हें तुरंत एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान पर निकलना है। ग्यारह बजकर बीस मिनट पर उन्हें ढाका के सर्किट हाउस में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बम गिरा कर उसमें व्यवधान डालना है हुआ ये था कि सुबह भारतीय वायु सेना ने ढाका गवर्नर हाउस और पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय के बीच एक संवाद को बीच में ही सुना था जिसमें कहा गया था कि पूर्वी पाकिस्तान के गवर्नर साढ़े ग्यारह बजे एक मीटिंग लेने वाले हैं जिसमें पाकिस्तानी प्रशासन के सारे आला अधिकारी भाग लेंगे वायुसेना मुख्यालय ने पूर्वी कमान को आदेश दिया कि इस बैठक के दौरान सर्किट हाउस पर बमबारी की जाए ताकि प्रशासन की ‘निर्णय लेने की क्षमता’ ही समाप्त हो जाए सर्किट हाउस की लोकेशन का कोई नक्शा ऑपरेशन रूम में नहीं था नक्शे के नाम पर उन्हें एक टूरिस्ट मैप दिया गया जिसे बिश्नोई ने अपनी साइड पॉकेट में खोंस लिया बिश्नोई ने बताया, "उस समय हमारे पास हमला करने के लिए महज 24 मिनट थे. उनमें से गुवाहाटी से ढाका तक पहुंचने तक का समय ही 21 मिनट था तो कुल मिला कर हमारे पास सिर्फ़ तीन मिनट बचते थे. मैं अपने मिग 21 का इंजिन स्टार्ट कर उसका हुड बंद ही कर रहा था कि मैंने देखा कि मेरी स्कवॉड्रन का एक अफ़सर एक कागज़ लहराता हुआ मेरी तरफ़ दौड़ा चला आ रहा है."
उस अफ़सर ने बिश्नोई को बताया कि अब टारगेट सर्किट हाउस न हो कर गवर्मेंट हाउस कर दिया गया है. बिश्नोई ने उससे पूछा कि ये है कहाँ? तो उसका जवाब था कि आप को ही पता करना है कि वो कहाँ है.
बिश्नोई कहते हैं कि इतना समय भी नहीं था कि विमान को रोक कर टारगेट को ढ़ूँढ़ने की बात सोची जाती.
उन्होंने बताया,"मैंने अपनी टीम के किसी पायलट को नहीं बताया कि टारगेट को बदल दिया गया है. मैं रेडियो पर ही उन्हें ये बता सकता था लेकिन अगर मैं ऐसा करता तो पूरी दुनिया को पता चल जाता कि हम क्या करने जा रहे हैं."
इस बीच गुवाहाटी से 150 किलोमीटर पश्चिम में हाशिमारा में विंग कमांडर आर वी सिंह ने 37 स्कवॉड्रन के सीओ विंग कमांडर एसके कौल को बुला कर ब्रीफ़ किया कि उन्हें भी ढाका के गवर्मेंट हाउस को ध्वस्त करना है कौल का पहला सवाल था
कि गवर्मेंट हाउस कहाँ है? इसके जवाब में उन्हें बर्मा शेल पेट्रोलियम कंपनी की तरफ़ से जारी किया गया एक दो इंच का टूरिस्ट मैप दिया गया.
इस बीच विश्नोई को गुवाहाटी से उड़े बीस मिनट हो चुके थे उन्होंने अनुमान लगाया कि वो तीन मिनट के अंदर अपने लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे उन्होंने वो नक्शा अपनी जेब से निकाला और उसको देखने के बाद उन्होंने अपने साथी पायलेट्स को रेडियो पर संदेश भेजा की ढाका हवाई अड्डे के दक्षिण में लक्ष्य को ढ़ूंढ़ने की कोशिश करें अब ये लक्ष्य सर्किट हाउस न हो कर गवर्मेंट हाउस है उनके नंबर तीन पायलट विनोद भाटिया ने सबसे पहले गवर्मेंट हाउस को ढूंढ़ा इसके चारों तरफ हरी घास का एक कंपाउंड था जैसा कि भारत के राज्यों की राजधानियों में स्थित राज भवनों में हुआ करता है.
बिश्नोई याद करते हैं, "मैं यह सुनिश्चित करने के लिए अपने मिग को बहुत नीचे ले आया कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल सही है या नहीं मैंने देखा वहाँ बहुत सारी कारें आ जा रही हैं, बहुत सारे सैनिक वाहन भी खड़े हुए हैं और पाकिस्तान का झंडा गुंबद पर लहरा रहा है मैंने अपने साथियों को बताया कि हमें यहीं हमला करना है."
उस समय गवर्नर हाउस में गवर्नर डॉ. एएम मलिक अपने मंत्रिमंडल के साथियों से मंत्रणा में व्यस्त थे तभी संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि जॉन केली वहाँ पहुंचे. मलिक ने मंत्रिमंडल की बैठक बीच में ही छोड़ कर कैली को रिसीव किया मलिक ने केली से पूछा कि वर्तमान परिस्थितियों के बारे में उनका आकलन क्या है? केली का जवाब था आपको और आपके
मंत्रिमडल के लोगों को मुक्तिवाहिनी अपना निशाना बना सकती है केली ने उन्हें सलाह दी कि आप तय किए गए तटस्थ क्षेत्र इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में शरण ले सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले आपको और आपके मंत्रिमंडल के सदस्यों को अपने पदों से इस्तीफ़ा देना होगा मलिक का जवाब था कि वो इस बारे में सोच रहे हैं, लेकिन ऐसा इसलिए नहीं करना चाहते कि कहीं इतिहास ये न कहे कि वो बीच लड़ाई में मैदान छोड़ कर भाग गए मलिक ने केली से पूछा कि क्या वो अपनी ऑस्ट्रियन पत्नी और बेटी को होटल भेज सकते हैं? केली ने कहा कि वो ऐसा कर तो सकते हैं लेकिन अंतर्राष्ट्रीय प्रेस को इसका आभास हो जाएगा और वो ये खबर ज़रूर फैलाएंगे कि गवर्नर का भविष्य से
विश्वास उठ गया है इसलिए उन्होंने अपने परिवार को होटल की शरण में भेज दिया है अभी ये बात चल ही रही थी कि लगा कि गवर्नर हाउस में जैसे भूचाल आ गया हो. बिश्नोई के छोड़े रॉकेट भवन पर गिरने शुरू
हो गए थे पहले राउंड में हर पायलट ने 16 रॉकेट दागे. बिश्नोई ने मुख्य गुंबद के नीचे वाले कमरे को अपना निशाना बनाया भवन के अंदर हाहाकार मच गया. केली और उनके साथी व्हीलर जंगले से बाहर कूदे और बचने के लिए बाहर पार्क एक जीप के नीचे छिप गए जॉन केली लिखते हैं, ( जॉन केली, थ्री डेज़ इन ढाका, 1971, पेज 649) "हमले के दौरान मेरा मुख्य सचिव मुज़फ़्फ़र हुसैन से सामना हुआ उनका रंग पीला पड़ा हुआ था. मेरे सामने से मेजर जनरल राव फ़रमान अली दौड़ते हुए निकले वो भी बचने के लिए कोई आड़ ढ़ूँढ़ रहे थे दौड़ते दौड़ते उन्होंने मुझसे कहा, भारतीय हमारे साथ ऐसा क्यों कर रहे रहे हैं ?"
विंग कमांडर बिश्नोई के नेतृत्व में उड़ रहे चार मिग 21 विमानों ने धुएं और धूल के ग़ुबार से घिरे गवर्नर हाउस पर 128 रॉकेट गिराए जैसे ही वो वहाँ से हटे, फ़्लाइट लेफ़्टिनेंट जी बाला के नेतृत्व में 4 स्कवॉड्रन के दो और मिग 21 वहाँ बमबारी करने पहुँच गए बाला और उनके नंबर 2 हेमू सरदेसाई ने गवर्नर हाउस के दो चक्कर लगाए और हर बार चार चार रॉकेट भवन पर दागे जिससे यह खुबसुरत गवर्नर हाउस खन्डर मे तब्दील हो हो गया
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