नमस्कार सज्जनो ।
हमारी विशेष प्रस्तुति "पथप्रदर्शक" की मे हम आपको आज रुबरु करवाते एक किसान के बेटे की कामयाबी की कहानी से जिसने परिश्रम की पुंजी से सफलता के शिखर को छुआ है
'हिम्मते मर्दा मदद्दे खुदा' यह उक्ति भले ही बेहद पुरानी हो चुकी हो मगर कुछ ऐसे होनहार होते हैं जिनकी सफलता की कहानी सुन यह बरबस ही याद आ जाती है। 'पथप्रदर्शक' में आज हम लिख रहे हैं ऐसे ही एक होनहार बिश्नोई युवा के कामयाबी की कहानी जिन्होंने एक छोटे से गाँव से उठकर सफलता की बड़ी इबारत लिखी है।
यह कहानी है भारतीय राजस्व सेवा में सहायक आयुक्त पद पर सेवारत अशोक बिश्नोई की कामयाबी की। जोधपुर जिले की फलोदी तहसील के एक छोटे से गाँव नोखड़ा में श्रीमती सुरती देवी व श्री किसनाराम के घर 15 फरवरी 1989 को जन्मे अशोक बिश्नोई गाँव के पहले राजपत्रित अधिकारी हैं। एक अर्से पूर्व तक शैक्षणिक रूप से पिछड़े नोखड़ा गाँव से उठकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सफल होना किसी मायने में करिश्मे से कम नहीं है।
जीवन के आरम्भिक दिनों में अशोक बिश्नोई को भी उन सभी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जो अमूमन एक सामान्य परिवार के बच्चों के सामने आती हैं। घर से 7 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय विद्यालय से प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की। दसवीं के बाद पढ़ने की सुविधा गाँव में नहीं थी अतः इनके मेहनतकश किसान पिता ने इन्हें आगे की पढ़ाई के लिए जोधपुर भेज दिया। जोधपुर में बारहवीं व उसके बाद जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की और बाद में इसी विवि से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर हुए।
बचपन से प्रशासनिक सेवा में जाने की चाह रखने वाले अशोक बिश्नोई उच्च शिक्षा के उपरांत बड़े भाइयों महीराम व दिनेश बिश्नोई (दोनों भारतीय सेना में) की सलाह पर प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली चले गये। अधिकारी बनने का जज्बा तो दिल में था ही वहाँ जाकर कठिन परिश्रम शुरू कर दिया। इस बीच इनका चयन सीमा सुरक्षा बल में सहायक कमाण्डेंट पद पर हुआ पर कुछ कर गुजरने की चाह में उन्होंने तैयारी जारी रखी। कहते भी है कि कड़ी मेहनत कभी निष्फल नहीं जाती अततः इनकी मेहनत भी रंग लायी और यह भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सफल हुए तथा प्रशिक्षण उपरांत भारतीय राजस्व सेवा में सहायक आयुक्त पद पर नियुक्ति मिली है।
अशोक बिश्नोई की सफलता की कहानी समाज के उन हजारों होनहारों का मार्गदर्शन करेगी जो सामान्य परिवारों व ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं मगर प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। समाज इनके जुनून को सलाम करते हुए भविष्य में सफलता के नये आयाम स्थापित करें ऐसी कामना करता है।
साभार:राजकुमार सिंह "आजाद
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