डांगियावास ।
31/10/2015
शीर्षक:- "असफलता से सफलता की और"
सर्वप्रथम RAS pre के सभी अभ्यर्थियों को मेरी और से परीक्षा में सफल हो ऐसी में ईश्वर से प्राथना करता हु...!!
लिखने को तो बहुत कुछ है मगर मुख्य बातो से ही अवगत करा पाऊंगा:-
आज के लेख के शीर्षक से ही आप जान चुके है की मेरा यह लेख उन सभी विधार्थियो के लिए है जो वर्तमान समय में या निकट भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी कर रहे है या करेंगेे.. असफलता बहुत ही छोटा शब्द है लेकिन अगर आप इसकी व्याख्या करने बैठेंगे तो शायद उस पर पूर्ण रूप से चर्चा कर ही नही पाएंगे,इसका सीधा सा अर्थ यही है की जिस काम में आप लगे हुए है और उसमे आप सफल नही हुए तो आपको असफलता प्राप्त हो जायेगी..असफल होने या असफलता प्राप्त होने का मतलब यह नही की आप पूर्ण रूप से असफल हो गए है या अब कभी आप खड़े नही हो पाएंगे इसका मतलब यही है की जिस काम में आप लगे हुए थे उस काम को पुरे मनोयोग से उसे पूर्ण करने में आपने अपना 100% नही दिया...अगर आप असफल हुए है तो ये असफलता आपकी ही है किसी दूसरे पर असफलता का परिणाम न थोपे तो बेहतर ही होगा,आजकल समय बड़ी तेजी से बदलता जा रहा है प्रत्योगी परीक्षाओ में लाखो लोग अपने भविष्य को अपने अनुरूप बदलने के लिए बैठते है आज के न्यूज़पेपर में आया की पटवारी के 4400 पद भरे जाएंगे जिसमे लगभग 15 लाख लोग अपना भविष्य बनाने के लिए उतरेंगे तो सोचिये 1 पद के लिए लगभग 340 प्रतिभागी..बड़ा विकट प्रश्न है इस दौर में नोकरिया मिलना पुराने जमाने की तरह आसान काम नही है बड़ी जद्दोजाद के बाद मुकाम पाया जाता है....इस दौर में आप स्वयं तय करे की आपको बनना क्या है..??सर्वप्रथम अपना लक्ष्य निर्धारित करे बिना लक्ष्य निर्धारित करे मंजिल नही पा सकेंगे अगर आपको RAS बनना है और कभी आप पटवारी की तैयारी करते है कभी बैंक क्लर्क या PO या कभी और,
बिना जानकारियो के आपके पास समझ होते हुए भी आपको कोई मुर्ख बना कर चला जाएगा इसलिए समय रहते चेत जाइए की हमें आखिर बनना कि है लक्ष्य तय करे नही तो आने वाले 10 साल 15साल बाद लोगो को कहानिया सुनाये करे की मेरा सलेक्शन तो हो जाता लेकिन छोटी मोटी कौन नोकरी करे या यु बहाना बनाया करेंगे की इस चेक जेक के जमाने में हमारा कहा नंबर लगेगा अगर आप ऐसा सोचते है ये आप स्वयं अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने का काम कर रहे है..क्योकि आज के दौर में मै कई ऐसे छात्रो का उदाहरण पस्तुत कर सकता हु जिनके पास न तो कोई चेक या जेक था वे अपनी काबिलियत मेहनत अथक परिश्रम से परीक्षाओ में अपना मुकाम हासिल कर पाये थे...मै उनका नाम लेकर परिचित करवा सकता हु IAS गोविंद जायसवाल,IAS हरीश चन्द्र , IAS निंबाराम जो गड़रिया का बेटा था,तमिलनाडु के जय गणेशं जो वेटर थे, RAS बींजाराम जी विश्नोई ऐसे कई उदाहरण है जिन्होंने अभावो में पलकर बिना किसी ना नुकर के अपनी मेहनत पर भरोसा जताकर यह सार्थक सिद्ध किया की कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नही...रमेश कुमार जी जो बाड़मेर के एक छोटे से गाँव भियाड़ के रहने वाले थे जिन्होंने 11 सालो के लम्बे संगर्ष के बाद IAS में सफलता प्राप्त की थी वे हर परीक्षा में 10वे प्रयास तक पिछड़ते रहे लेकिन उन्होंने जो ठानी थी कर दिखाया मेहनत में कमी नही रखी और 11वे प्रयास में IAS बनके दिखाया..असफलता हर व्यक्ति के नसीब में होती है हालातो का रोना रोकर नही बैठे बहाने नही बनाये जब बुढ़ापा हावी होगा तब कन्धों पर जो दोहरी जिंदगी जीने का भार आएगा तब मुश्किलें और बढ़ जाएंगी...
जीवन का प्रत्येक शन बहुत कीमती है इसे मौज मस्तियों में न गवाए..
अगर आप सफल होना चाहते है तो समय रहते समय की कद्र करना सीखिये वर्ना समय अपना समय आने पर आपकी कद्र नही कर पायेगा..आत्मविश्वास बनाये रखे आत्मविश्वास का सीधा सा अर्थ है खतरा उठाने और जीतने की मानसिक तैयारी मन में उल्हास पैदा करे बिना उत्साह उल्लाह के कभी बड़ा काम नही हुआ.....!!
मित्रो और भी बहुत सी बाते है,जानकारियां है जिन्हें आप तक पहुचाने का मन करता है लेकिन समयाभाव के कारण फिर कभी.... आप अछि तैयारी करे खुद पर यकीन उतपन्न करे बस आपने जो लक्ष्य लिया है उससे बस एक कदम दूर है मेहनत का कोई विकल्प नही.....!!
शुभ रात्रि
!!....जय हिन्द....!!
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