जैसलमेर में तैनात कर्नल प्रसाद की मौत
डांगियावास । शारीरिक हो या पारिवारिक परेशानियों को दरकिनार कर विषम हालात में अपनी टीम का नेतृत्व करना ही भारतीय सेना के अधिकारियों को सबसे अलग खड़ा करता है। सामान्य बुखार में जहां आमजन सबसे पहले अपने काम से अवकाश लेकर आराम करने को तव्वजो देता है वहीं भारतीय सेना के एक अधिकारी ने तेज बुखार के कारण तपते बदन और थकान को दरकिनार कर थार के रेगिस्तान में युद्धाभ्यास कर रहे अपने जवानों का साथ छोड़ना पंसद नहीं किया। हमारे जैसलमेर सवावदाता ने बताया की जैसलमेर जिले में इन दिनों चल रहे युद्धाभ्यास में भाग ले रही भारतीय सेना की 12 गार्ड के कमान अधिकारी कर्नल विष्णु प्रसाद की लगातार बुखार के कारण तबीयत इतनी बिगड़ी कि एयर लिफ्ट कर इलाज के लिए जोधपुर लाना पड़ा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। मल्टीपल ऑर्गन फैलियर के कारण उनकी मौत हो गई।
कर्नल प्रसाद उड़ीसा के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुचित्रा व पांच साल की बेटी पीहू है। कर्नल प्रसाद का दाहसंस्कार जैसलमेर में ही कर दिया गया। कर्नल के साथियों ने बताया कि उन्हें कई दिन से बुखार आ रहा था। इस बुखार से उन्हें स्वाइन फ्लू हो गया। भारतीय सेना की कई यूनिट्स इन दिनों जैसलमेर में थार के रेगिस्तान में युद्धाभ्यास कर रही है। इनमें से 12 गार्ड भी शामिल है। 12 गार्ड के कमान अधिकारी कर्नल प्रसाद को कई दिन से बुखार आ रहा था, लेकिन उन्होंने युद्धाभ्यास जैसे महत्वपूर्ण आयोजन के बीच में ही अपने जवानों को छोड़ने से इनकार कर दिया। पांच दिन पूर्व उन्हें बुखार बहुत तेज हो गया। इसके बावजूद वे अपने जवानों के साथ डटे रहे। लगातार बुखार के कारण हो रही थकान को दरकिनार कर वे लगातार अपनी कमान का नेतृत्व करते रहे। उनके एक साथी ने बताया कि बीमार होने के बावजूद कर्नल प्रसाद का वहीं ठहरने का फैसला आश्चर्यजनक नहीं था। वे पहले भी कई बार ऐसा कर चुके थे। बरसों तक उनके साथ रहे एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उन्होंने कभी किसी चुनौती से मुंह नहीं मोड़ा चाहे कैसे ही हालात बने हो। एक माह से भी कम समय में जैसलमेर क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपना दूसरा अधिकारी गंवा दिया है। कुछ दिन पूर्व पोकरण फायरिंग रेंज में हुए एक हादसे में मेजर ध्रुव की मौत हो गई थी।
dangiyawasnews.com परिवार की तरफ से कर्नल साहब को नम आंखो से विदाई ।
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