चिंता का विषय:जाट समाज में बढ़ती आपसी रंजिश और खत्म होता भाई चारा|
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जाट एक आदिकालीन समुदाय है और प्राचीनतम
क्षेत्रीय वर्ग है जिसकी अनेक अनुपम विशेषताएं हैं.
जाट समाज की सामाजिक सरंचना बेजोड़ है. जाट समाज ने
आदिकाल से कुछ सर्वमान्य सामाजिक मापदण्ड
स्वयं ही निर्धारित कर रखे हैं और इनके सामाजिक
मूल्यों का निरंतर संस्तरण होता आ रहा है. जाट
समाज की गोत्र और खाप व्यवस्थाएं अति प्राचीन
हैं और आज भी इनका पालन हो रहा है. जाट समाज
में अपने वंश गोत्र के लोग परस्पर भाई-भाई की तरह
मानते है| शादी हो या घर में कुछ काम-काज जाट बंधू आपस में कंधे से कन्धा मिलाये खड़े मिलते है।जाटो की सामाजिक सरंचना इस प्रकार के ताने बाने से बनी हुई है की ऐसा लगता है की भाई चारे की भावना तो हमारे रक्त में ही मिली होती है।
बदलाव के इस दौर से जाट भी अछूते नही रहे ।। समय के साथ बदलाव की इस भावना ने हमे भी स्वार्थी और आपमतलबी बना दिया ।। लोग समाज और गाँव से ज्यादा खुद की उन्नति को ज्यादा तव्जो देने लगे । रही सही कसर इन राजनेताओ ने पूरी कर दी । अब हम जाति ओर समाज के काम से ज्यादा रूचि अपने काम में लेने लगे । यही कारन है की हम अभी भी उतना विकास नही कर पाए जितना हमारी जनसँख्या के अनुपात के हिसाब से होना चैये था ।।
ग्रामीण परिवेश की बात करे तो हालत और भी ज्यादा ख़राब है यहाँ ज्यादातर गाँवो में जाटो की संख्या अधिक है और कई सारे गाँव तो ऐसे है जहा पूरा गाँव एक ही जाति से भरा हुआ है और ऐसे गाँवो में एक ही जाति में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक हो जाती है और नतीजन आपसी फुट और भाईचारे में कमी देखने को मिलती है । एक दुसरे से आगे निकलने और समाज में अपना रुतबा मनाने की इस संकीर्ण सोच ने जाट समाज को विकास से काफी पीछे धकेल दिया है । विशेष तौर से राजनेतिक क्षेत्र में एक दुसरे को पछारने की इस जिद ने भाई भाई को अपना दुश्मन बना दिया है । बीसलपुर काण्ड भी इस बात का गवाह है । इस प्रकार की घटनाओ से हमारे समाज और जाती का विकास जहा एक और बाधित होता है वही दूसरी और युवा पीडी में गलत सन्देश जाता है और वो भी ज्यादा भर्मित्त होते है
अब जरूरत है समाज को जागरूक करने की । और इसकी सुरुआत हमे खुद से सुरु करनी होगी । अपने निजी स्वार्थ को परे करते हुए हमे अपने समाज और जात की भलाई और सर्वागीण विकास के लिए ध्यान देना चाइये यही आज के जमाने की मांग है । वरना इथिहस गवाह है जब जब हम आपस में लड़े है दुश्मनों ने हमारी इस जन्मजात कमजोरी का फायदा उठाया है ।। जय जाट
जाट बलवान - जय भगवान
नोट :- आप सभी जाट मित्रो से अनुरोध है की अपने समाज और जाति के विकास के लिए और भी अगर सुझाव हो तो हमे बताये । हम आपकी बात को पुरे समाज में फ़ैलाने और उन्हें जागरूक करने की एक कोसिस करेंगे ।
राम राम ����
नोट :- क्रपया इसके पीछे अपना नाम ना जोड़े । यह लेख www.dangiyawasnews.blogspot.com की सयुक्त टीम दुआरा लिखा गया है ।
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