जोधपुर. इस बार का बिजली बिल बढ़ा हुआ आएगा। बिजली कंपनियों ने फरवरी से बढ़ी दरें 95 पैसे प्रति यूनिट और 12 माह का फ्यूल सरचार्ज एक साथ ही जोड़ दिया है। इससे मासिक 450 या इससे ज्यादा यूनिट बिजली के उपभोक्ता के बिल में 550 से 1000 रुपए ज्यादा जुड़ कर आएंगे। राहत की बात यह है कि इन गर्मियों में जोधपुर सहित प्रदेश में बिजली कटौती नहीं होगी।
कारण कि दो माह में राज्य के पास 250 से 300 लाख यूनिट (एलयू) तक बिजली सरप्लस की संभावना। जल्दही कालीसिंध की थर्मल पावर की 660 मेगावाट की एक और यूनिट शुरू होगी। विंड पावर से 300 एलयू बिजली मिलेगी। प्रदेश के पास मांग से ज्यादा बिजली होने से पावर एक्सचेंज में सरप्लस बिजली बेचने की तैयारी भी होगी।
बिजली कंपनियों ने एक फरवरी के बिल से बढ़ी दरें 95 पैसे प्रति यूनिट और 12 माह का फ्यूल सरचार्ज एक साथ ही जोड़ दिया है। इन दोनों के जुड़ने के बाद एक मध्यम वर्गीय उपभोक्ता जो हर माह 450 या इससे ज्यादा यूनिट बिजली का उपभोग करता है, उसके बिल में 550 से 1000 रुपए ज्यादा जुड़ कर आएंगे। जोधपुर डिस्कॉम की निदेशक (वित्त) कीर्ति कच्छवाह का कहना है कि ये राशि उपभोक्ताओं के बिल में जुड़नी शुरू हो गई है। अब मार्च अप्रैल में जारी होने वाले बिलों में जोड़ कर दी जाएगी। 30 रु. फिक्स चार्ज भी बढ़ कर जुड़ेंगे।
29 लाख उपभोक्ता होंगे प्रभावित
जोधपुर डिस्कॉम के दस जिलों में कुल 29 लाख उपभोक्ता हैं। इन पर सीधे ही बिजली की बढ़ी दरों का भार बढ़ने के साथ फ्यूल चार्ज भी जुड़ेगा। डिस्कॉम के 31 शहरों कस्बों में जहां एचसीएल बिल बना रही है, वहां 12 लाख उपभोक्ताओं के बिल में ये राशि जोड़ दी गई।
रबी की फसल के खराबे के बाद अब गर्मियों में डबल सिंचित क्षेत्र में मूंगफली जैसी फसल की कम बुवाई होगी। कृषि क्षेत्र में मांग भी कम हो जाएगी और घरेलू क्षेत्र में बिजली की मांग पचास फीसदी से ज्यादा होगी। प्रदेश में गत 27 28 फरवरी और 13 मार्च के बाद लगातार हुई बारिश ओलावृष्टि के कारण बिजली की खपत अभी तक घट कर 1350 से 1400 एलयू प्रतिदिन रह गई है। तापमान बढ़ने के बाद खपत 1600 से 1700 एलयू प्रतिदिन रहने के आसार है, जबकि राज्य के पास करीब दो हजार एलयू बिजली उपलब्ध होगी। ऐसे में 300 एलयू बिजली सरप्लस रहने की संभावना है।
बिजली की मांग कम होने की अहम वजह यह भी है कि प्रदेश की बड़ी निजी कंपनियां अब भी सीधे ही ओपन मार्केट से बिजली खरीद रही हैं। पावर एक्सचेंज में तेजी-मंदी के आधार पर बिजली खरीदी जा रही है। इसके लिए कंपनियां डिस्कॉम के प्रसारण तंत्र का इस्तेमाल करती हैं। इसके चलते तीनों डिस्कॉम पर बिजली का बोझ कम हो गया। गर्मियों में घरेलू क्षेत्र में ही बिजली की ज्यादा मांग रहेगी।
कहां से कितनी बिजली आएगी
प्रदेश को घरेलू और केंद्र के पावर प्लांट से 1350 से 1500 एलयू बिजली मिलती है। प्रदेश की उत्पादन इकाइयों से रोजाना औसतन 800-900 एलयू बिजली मिलती है। केंद्र से प्रदेश को अपने हिस्से की 550 से 660 एलयू रोजाना मिल रही है। अब कालीसिंध की एक और यूनिट से दो सौ एलयू विंड पावर से तीन सौ एलयू के बाद यह आंकड़ा रोजाना 2000 एलयू से ज्यादा हो जाएगा।
अभी राजस्थान में बिजली की मांग काफी कम है। अगले माह काली सिंध की एक और यूनिट शुरू होने से प्रदेश में सरप्लस बिजली रहने की संभावना है। इससे बिजली ओपन मार्केट में दी जा सकती है। -डीएल जाखड़, चीफइंजीनियर, राजस्थान डिस्कॉम्स पावर परचेज सेंटर
बिजली कंपनियों ने एक फरवरी के बिल से बढ़ी दरें 95 पैसे प्रति यूनिट और 12 माह का फ्यूल सरचार्ज एक साथ ही जोड़ दिया है। इन दोनों के जुड़ने के बाद एक मध्यम वर्गीय उपभोक्ता जो हर माह 450 या इससे ज्यादा यूनिट बिजली का उपभोग करता है, उसके बिल में 550 से 1000 रुपए ज्यादा जुड़ कर आएंगे। जोधपुर डिस्कॉम की निदेशक (वित्त) कीर्ति कच्छवाह का कहना है कि ये राशि उपभोक्ताओं के बिल में जुड़नी शुरू हो गई है। अब मार्च अप्रैल में जारी होने वाले बिलों में जोड़ कर दी जाएगी। 30 रु. फिक्स चार्ज भी बढ़ कर जुड़ेंगे।
29 लाख उपभोक्ता होंगे प्रभावित
जोधपुर डिस्कॉम के दस जिलों में कुल 29 लाख उपभोक्ता हैं। इन पर सीधे ही बिजली की बढ़ी दरों का भार बढ़ने के साथ फ्यूल चार्ज भी जुड़ेगा। डिस्कॉम के 31 शहरों कस्बों में जहां एचसीएल बिल बना रही है, वहां 12 लाख उपभोक्ताओं के बिल में ये राशि जोड़ दी गई।
रबी की फसल के खराबे के बाद अब गर्मियों में डबल सिंचित क्षेत्र में मूंगफली जैसी फसल की कम बुवाई होगी। कृषि क्षेत्र में मांग भी कम हो जाएगी और घरेलू क्षेत्र में बिजली की मांग पचास फीसदी से ज्यादा होगी। प्रदेश में गत 27 28 फरवरी और 13 मार्च के बाद लगातार हुई बारिश ओलावृष्टि के कारण बिजली की खपत अभी तक घट कर 1350 से 1400 एलयू प्रतिदिन रह गई है। तापमान बढ़ने के बाद खपत 1600 से 1700 एलयू प्रतिदिन रहने के आसार है, जबकि राज्य के पास करीब दो हजार एलयू बिजली उपलब्ध होगी। ऐसे में 300 एलयू बिजली सरप्लस रहने की संभावना है।
बिजली की मांग कम होने की अहम वजह यह भी है कि प्रदेश की बड़ी निजी कंपनियां अब भी सीधे ही ओपन मार्केट से बिजली खरीद रही हैं। पावर एक्सचेंज में तेजी-मंदी के आधार पर बिजली खरीदी जा रही है। इसके लिए कंपनियां डिस्कॉम के प्रसारण तंत्र का इस्तेमाल करती हैं। इसके चलते तीनों डिस्कॉम पर बिजली का बोझ कम हो गया। गर्मियों में घरेलू क्षेत्र में ही बिजली की ज्यादा मांग रहेगी।
कहां से कितनी बिजली आएगी
प्रदेश को घरेलू और केंद्र के पावर प्लांट से 1350 से 1500 एलयू बिजली मिलती है। प्रदेश की उत्पादन इकाइयों से रोजाना औसतन 800-900 एलयू बिजली मिलती है। केंद्र से प्रदेश को अपने हिस्से की 550 से 660 एलयू रोजाना मिल रही है। अब कालीसिंध की एक और यूनिट से दो सौ एलयू विंड पावर से तीन सौ एलयू के बाद यह आंकड़ा रोजाना 2000 एलयू से ज्यादा हो जाएगा।
अभी राजस्थान में बिजली की मांग काफी कम है। अगले माह काली सिंध की एक और यूनिट शुरू होने से प्रदेश में सरप्लस बिजली रहने की संभावना है। इससे बिजली ओपन मार्केट में दी जा सकती है। -डीएल जाखड़, चीफइंजीनियर, राजस्थान डिस्कॉम्स पावर परचेज सेंटर
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