डांगियावास । एक ऐसा गाँव जिसे किसी को पहचान बताने की सायद ही जरूरत हो । शुरू से ही हर एक गतिविधि में आगे रहा यह गाँव एक एहम क्षेत्र में पिछड़ गया और वो है खुद का विकास
यू तो अगर आप स्टेशन का नजारा देकेंगे तो लगेगा की गाव बहुत विकसित है । मगर रुकिए । आप हकीकत से बहुत अनजान है कहते है न की सच बहुत कडवा होता है मगर जो हकीकत है उसे बताने में भी संकोच नही करना chaiye ।
विकास को तरसते गाव में थोड़े बहुत विकास कार्य हुए पर वो भी चुनावी निकले । अंतिम वर्ष में काफी सारा काम हुआ पर वो पूर्णत राजनेतिक पर आधारित थे । गाव में जगह जगह सड़क निर्माण का काम हुआ पर उसमे भी पारदर्शिता नही बरती गई और न ही भविष्य को ध्यान मे रकते हुए निर्माण हुआ । सड़क तो बना दी गई पर जो पानी निकासी की नालिय थी वो दब कर रह गई जिससे सारा पानी एक जगह जाने लगा और गन्दगी ज्यादा फेल गई । बरसात के दिनों में गाव के अंदर जाना सुन्दर वन के जंगलो में जाने के बराबर हो गया है । अब थोडा आगे चलिए । उमाभारती जी के मंदिर के पास बनी सड़क इतना कंफ्यूज करती है की पता नही चलता की अब किदर जाना है । मतलब 3 रस्ते निकल दिए और बिच में खड्डे छोड़ दिए । वह काफी सारी खुली जगह है तो 2 जगह सड़क बने और उनके बिच में 4 से 5 फिट की जगह छोड़ दी पानी और गंदगी के लए । जिससे हर समय दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है । मान निये सरपंच साहब से एक निवेदन है की जो सड़क वह बनी है उसके बिच खाली पड़ी जगह पर या तो आप ग्रेवल सड़क बनवाने का कष्ट करे या फिर भराई करवाके समतल करवाए । ताकि राहगीर परेशान न हो ।
नोट :- मेरा यह आलेख किसी भी पार्टी या राजनेतिक स्वार्थ से पूर्णत रहित है हमारा उद्देश्य सिर्फ लोगो को जागरूक करना और ग्राम विकास में भागीदारी निभाना मात्र है ।
आईये आप भी 2 कदम हमारे साथ चलकर अपनी भागीदारी निभाए ।
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