राजस्थान के हर व्यक्ति पर 42 हजार रुपए का कर्ज है। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने बजट बहस का जवाब देते हुए कहा कि यह पूर्ववर्ती सरकार के लचर वित्तीय प्रबन्धन का ही परिणाम है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 की समाप्ति पर राज्य पर कुल खर्च 1 लाख 47 हजार करोड़ रुपए हो गया है। अगर इसमें बिजली कम्पनियों तथा राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम का कर्ज भी शामिल कर लिया जाए तो कुल कर्ज 2 लाख 90 हजार करोड़ रुपए हो जाता है। ऐसी कठिन परिस्थिति में भी हम सबको साथ लेकर और सबके विश्वास से जनआकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेंगे।
योजनागत व्यय में हो सकती है कटौती
मुख्यमंत्री के विधानसभा में स्पष्ट संकेत के बाद संभव है कि योजनागत व्यय में कटौती की जा सकें। साथ ही उन योजनाओं की समीक्षा भी सीएमओ स्तर पर की जा सकती है जिनमें आवश्यकता से अधिक खर्च हो, लेकिन परिणाम बेहद कम हो।
केंद्रीय सहयोग में भी कमी संभव
केंद्र सरकार ने आम बजट में राज्यों को दिए जा रहे धन में कटौती के संकेत दिए है। ऐसे में राजस्थान के हिस्से केंद्र के रास्ते आ रही सहयोग राशि में कमी की पूरी संभावना है।
मोटे अनुमानों के तौर पर पिदले साल के मुकाबले करीब सात फीसदी कम धनराशि इस वर्ष केंद्रीय सहयोग से राजस्थान में संचालित योजनाओं में होगी।
केंद्र सरकार ने आम बजट में राज्यों को दिए जा रहे धन में कटौती के संकेत दिए है। ऐसे में राजस्थान के हिस्से केंद्र के रास्ते आ रही सहयोग राशि में कमी की पूरी संभावना है।
मोटे अनुमानों के तौर पर पिदले साल के मुकाबले करीब सात फीसदी कम धनराशि इस वर्ष केंद्रीय सहयोग से राजस्थान में संचालित योजनाओं में होगी।
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