दोनों एक ही संस्थान में पढ़े और फिर अलग-अलग कंपनियों में नौकरी करने लगे। कभी सोचा भी नहीं था कि उनके जीवन में इतनी बड़ी सफलता एक ही पल में आ जाएगी। कुछ साल पहले जो एक प्रयोग था, आज उनके लिए करोड़ों का मुनाफा बन गया। उनकी कंपनी टैक्सी फॉर श्योर को ओला ने खरीद लिया है। टैक्सी फॉर श्योर दिल्ली सहित देश के 47 शहरों में अपनी सुविधा प्रदान करती है।
इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की डिग्री सूरतकल से लेने के बाद अप्पु (अपरामेय का लोकप्रिय नाम) ने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया। छोटी मोटी कंपनियों में नौकरी के बाद इंफोसिस आ गए। वहां तीन साल रहे। प्रयोग करने की उथल-पुथल हमेशा दिमाग में चलती रहती थी। रघु टैक्सस इंस्ट्रूमेंट्स के साथ एक साल काम कर चुके थे। दोनों का भी किस्सा एक सा ही है। दोनों बैचमेट हैं। दोनों ने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए किया। एक दूसरे को 16 साल से जानते हैं।
वे बताते हैं कि जब भी कहीं बाहर जाना होता था, टैक्सी के लिए परेशान होते थे, ऑपरेटरों को फोन लगाते थे। दो या तीन घंटे में टैक्सी मिल पाती थी। परेशान हो जाते थे। फिर इस बात पर कई दिन बहस चली कि केवल सर्च इंजिन बनाकर टैक्सी ऑपरेटर की लिस्ट डालें या रेडियो टैक्सी इंडस्ट्री में उतरा जाए। जून 2011 की एक सुबह अप्पू और रघु ने टैक्सी फॉर श्योर के नाम से कंपनी बनाई। बेंगलुरू में 100 नेनो खरीद कर टैक्सी सेवा शुरू कर दी। असली संघर्ष यहां से शुरू हुआ। कुछ समय बाद व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम तैयार कर लिया। तभी अप्पु को डेंगू हो गया और एक महीने के लिए बिस्तर पकड़ लिया। सारा काम रघु के जिम्मे आ गया। इस परेशानी के हल के लिए कंपनी की वेबसाइट और एप बनाया, जिस पर बुकिंग हो सके। यह भी ध्यान रखा कि उनका एप इंग्लिश, हिंदी और कन्नड़ भाषा बोलने वालों को समझ में आ सके। यह एप एंड्रायड और विंडोज स्टोर पर टॉप रैंकिंग में आता है, जिसे 5 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है।
47 शहरों में सुविधा साथ ही ऑटो लोन भी दिए
आज देश के 47 शहरों में यह सुविधा है। कंपनी ने बेंगलुरू में ऑटो सर्विस भी शुरू कर दी। इतना ही नहीं दोनों ने 2स्ट्रोक ऑटो वालों को फोर स्ट्रोक ऑटो के लिए लोन भी दिया और अपनी टीम में विश्वस्त साथी के रूप में शामिल कर लिया। पैसे के लिए थ्री व्हील्स यूनाइटेड नाम की कंपनी से हाथ मिलाया। कंपनी के ऑटो पैकेज का नाम है ‘नम्मा ऑटो’। बाजार में प्रतिस्पर्धा को दोनों ने पहले ही भांप लिया था, तो पिछले साल ही पहले चार किमी के लिए 49 रु. का किराया तय कर दिया। बाकायदा इसके लिए दोनों कस्टमर्स के साथ बैठे और उनसे चर्चा की। इतने कम पैसों में टैक्सी-ऑटो लोगों को आकर्षित करने लगे।
ओला ने खरीदा
ओला ने टैक्सी फॉर श्योर को खरीदा है। खास बात ये है कि ओला के फाउंडर भी दो दोस्त हैं। भाविष अग्रवाल और अंकित भाटी आईआईटी बॉम्बे के एल्यूमनाई हैं। अब इस नई टैक्सी फॉर श्योर और ओला कंपनी के सीईओ अरविंद सिंघल होंगे। दोनों कंपनियां एक हो गई है, लेकिन ऑपरेशन अलग-अलग ही होगा और सबसे कम किराया 49 रु. ही होगा।
अपरामेय राधाकृष्णन
उम्र- 33 वर्ष
परिवार- पत्नी
उम्र- 33 वर्ष
परिवार- पत्नी
रघुनंदन गंगप्पा
उम्र- 34 वर्ष
परिवार- पत्नी शिल्पा बाल्कुर उडुपा
परिवार- पत्नी शिल्पा बाल्कुर उडुपा

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