10 बातें जो किसी आर्टस् स्टूडेंट से कभी नहीं बोलनी चाहिए
1.पहाड़े कितने तक आते हैं?
अगर आप ये सिर्फ मज़ाक के लिए पूछ रहे हैं तब तो ठीक है, नहीं तो आपका थोबड़ा कभी भी बिगड़ सकता है.
2.इसका आई-क्यू कम है
अब तुम हमरा आई-क्यू क्या जानो बाबू मोशाय! कि साइंस और कॉमर्स की सारी लड़कियां हम पर यूं ही जान थोड़े न छिड़कती हैं.
3.इंजीनियरिंग की तैयारी नहीं किए थे ?
वो क्या है न! कि इंजीनियरिंग करके लोग नौकरी मांगते हैं और आर्टस् पढ़ के नौकरियां बांटते हैं... टाटा, बिरला, अम्बानी का नाम नहीं सुने हो क्या?
4.आर्टस् लिए हो, क्या करोगे ?
जी इरादा तो (यूपीएससी) करने का है, वैसे पत्रकारिता की पढ़ाई तो साथ में चल ही रही है तो गिरते-पड़ते पत्रकार तो बन ही जाएंगे.
5.जिनको कुछ नहीं मिल पाता वे आर्टस् लेते हैं
जी नहीं! ऐसी कोई बात नहीं है, हम मैथ्स में भी उतने ही बढ़िया हैं बस हिस्ट्री, पौलिटिकल साइंस इसलिए ली है कि हमें वे ज्यादा पसंद है और हिस्ट्री पढ़ने वाले ही तो हिस्ट्री बदलते हैं.
6.तुम्हारा सारा समय तो कैंटीन में ही बीतता होगा
हां तो इसमें क्या हर्ज है, आखिर असली ज्ञान तो क्लास के बाहर ही मिलता है बेटा! अब आइंस्टीन ने किस क्लास में पढ़ाई की थी इ हम बताएं कि तुम खुदै गूगल करोगे.
7.तुम्हारी तो रफ और फेयर कॉपी एक ही होगी
हां हम तो कला के प्रेमी हैं और आपने वो कहावत नहीं सुनी कि “पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय... ढाई आखर प्रेम के पढ़ा सो पंडित होय”, और दुनिया कॉपी-किताबों के बाहर भी होती है मेरे दोस्त!
8.आर्ट्स में लड़कियाँ पढ़ती हैं
भाई बस दुखती रग यही होती है! अब जो इतनी ही लड़कियां आर्ट्स में पढ़ती तो हम साइंस और कॉमर्स कॉलेज के चक्कर क्यों लगाते, इसलिए दुबारा मत पूछना!
9.ये तो टेक्नोलॉजी में कमजोर होगा
अरे बच्चू हम मोबाइल और कम्प्यूटर तब से इस्तेमाल कर रहे हैं जब तुम चड्डी में घूमा करते थे और टेक्नोलॉजी का आर्ट से बहुत पुराना वास्ता है कि किसी भी मैंकेनिक ने कभी साइंस की पढ़ाई नहीं की है.
10.ये तो बॉलीवुड और भोजपुरिया सिनेमा ही देखता होगा
भाई इस दुनिया को सबसे बड़े साहित्यकार और कलाकार आर्टस् ने ही दिए हैं मगर हम इस पर गुमान नहीं करते, अब दादा साहेब फाल्के, शेक्सपीयर और चार्ली चैपलिन कोई साइंटिस्ट थोड़े न थे.
कागद कारे करने से ही गर सब कुछ हो जाता तो फिर टाइपराइटर सबसे ज्यादा कमाता न! तो इसलिए आइडिया और ऐक्शन की ज्यादा अहमियत होती है और ऐक्शन को आर्टस् वालों से बेहतर कौन समझता है.
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