उपसरपंच चुनाव के बाद जब हनुमान की नब्ज टटोली तो उन्होंने नैतिक मूल्यों का समर्थन करते हुए कहा की बड़े बुजुर्गो की बातो और उनकी नसीहत को मानना चाहिए।और उनकी भावनाओ की कद्र करनी चाहिए।इसी कारण आज मैंने उपसरपंच चुनाव में अपना रोष प्रकट नही किया।
मेरा मानना है की राजनीती में युवाओ की भागीदारी होनी चाहिए।पर उन भावनाओ के चलते बुजुर्गो को भी नजरअंदाज नही किया जाना चाहिए।
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