नोट: ये पोस्ट सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है न की राजनितिक द्वेष के चलते।
अत: अपनी भावनाये आहत न करे।
आज की डायरी।
दिनांक: 20 जनवरी 15
सुबह 10 बजे सरपंच उम्मीदवार खेमे से फ़ोन आया,और वहाँ पर मेरी उपस्तिथि दर्ज न करवाने की वजह से डांट कहानी पड़ी।मैंने भी फ़ोन पर तुरंत आने का भरोसा दिलाया।। उसके बाद मैंने मेरे मित्र को फ़ोन किया और उसको भी साथ में बुलाया। मेरे मित्र के आने के बाद हमने तय किया की हम लोग गाँव के तीनो सरपंच उम्मीदवार के कैंप में जायेगे।चूँकि हम गाँव में रहते है तो ये जरुरी है की गाँव में आपसी भाईचारे की भावना को ठेस न पहुचाये। और अपनी उपस्तिथि सभी जगह दर्ज करवायेगे।
जैसे ही नथमल की दुकान के पास से होते हुए उमा भारती देवस्थान को पार किया और सुप्रीम कोर्ट के पास पहुचे। तो कोर्ट के पास ही नाकाबंदी पर तैनात भाई साब ने धर लिया। और तुरंत ही बायीं और टर्न लेने का आदेश दिया।
बायीं और टर्न लेने के बाद हम कैंप में पहुचे।वहां पर जलपान करने के पश्चात हम लोग वहां से निकल ही रहे थे। तो साब मिल गए और बताया की मेरा नाम तो वोटर लिस्ट में है ही नही। बाद में पता चला की राजनितिक द्वेष के चलते मेरा नाम कटवा दिया गया।
क्रमश::::
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