FILM REVIEW: दीपिका पादुकोण, अर्जुन कपूर और कई कलाकारों की भीड़ वाली 'फ़ाइंडिंग फ़ैनी' क्या दर्शकों की भीड़ जुटा पाएगी? read review now

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?


फ़िल्म रिव्यू: 'फ़ाइंडिंग फ़ैनी'

'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
फ़िल्म : फ़ाइंडिंग फ़ैनी
निर्देशक : होमी अदजानिया
कलाकार : नसीरुद्दीन शाह, दीपिका पादुकोण, अर्जुन कपूर
रेटिंग : ***1/2
'फ़ाइंडिंग फ़ैनी' के किरदारों को देखकर लगता है जैसे उन्होंने सदियों से सेक्स ना किया हो.
फ़िल्म में 'कोंकण का कैसिनोवा' फ़र्डी (नसीरुद्दीन शाह) है जिसकी ज़िंदगी में चालीस सालों से कोई औरत नहीं है.
उसने जवानी के दिनों में अपनी गर्लफ़्रेंड फ़ैनी को शादी का प्रस्ताव एक ख़त के ज़रिए भेजा था जो फ़ैनी तक पहुंचा ही नहीं.
फ़र्डी के पड़ोसियों का हाल भी कुछ अच्छा नहीं है.
'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
एंजी (दीपिका पादुकोण) वर्जिन (कुंआरी) है. शादी के दिन ही उसके पति की मौत हो जाती है.
उसके बचपन के दोस्त (अर्जुन कपूर) की भी लड़कियों के मामले में वैसी ही किस्मत है जैसी एंजी की लड़कों के मामले में है.
एंजी की सास (डिंपल कपाड़िया) की ज़िंदगी में प्यार की बौछार क्या छींटे तक नहीं है.
यही हाल एक सिरफिरे चित्रकार (पंकज कपूर) का है जो अपने मास्टरपीस के लिए किसी प्रेरणा (ख़ूबसूरत लड़की) की तलाश में होता है.

अतार्तिक लेकिन मज़ेदार

'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
ये सारे लोग मिलकर फ़र्डी की खोई हुई गर्लफ़्रेंड फ़ेनी को खोजने के लिए एक रोड ट्रिप पर निकल पड़ते हैं.
साफ़ है कि इनके गांव में इंटरनेट या फ़ेसबुक जैसी तकनीक पहुंची ही नहीं है.
ये लोग मोबाइल तो छोड़िए लैंडलाइन के बारे में भी नहीं जानते.
'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
इसलिए तार्किक ढंग से सोचो तो फ़िल्म में कुछ भी तर्कसंगत नहीं लगता.
लेकिन यही तो लेखक-निर्देशक होमी अदजानिया की ख़ूबी है.
उन्होंने ऐसा संसार रचा है कि आप इन सब अतार्किक बातों की परवाह किए बिना कहानी के बहाव के साथ बहे चले जाते हो.

सटीक हास्य

'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
फ़िल्म कोई महान संदेश नहीं देती. इसके पास कहने को कोई बड़ी बात भी नहीं है, लेकिन फिर भी आप फ़िल्म से जुड़े रहते हो.
फ़िल्म का हास्य बड़ा सटीक है. संवाद मज़ेदार हैं.
फ़ाइंडिंग फ़ैनी सुकून देती है. इसका मधुर बैकग्राउंड संगीत भी कानों में रस घोलता है.
गोवा को ख़ूबसूरत तरीक़े से पेश किया गया है.

जानदार नसीर

नसीरुद्दीन शाह
सभी कलाकार बेहतरीन फ़ॉर्म में हैं.
ख़ासतौर से नसीरुद्दीन शाह का तो जवाब ही नहीं.
चार दशकों से भी ज़्यादा समय से वो हर फ़िल्म को, हर रोल को उसी ऊर्जा और शिद्दत से करते हैं. नए कलाकारों के लिए तो वो एक स्कूल हैं.
फ़िल्म हो, टीवी हो या थिएटर, हर विधा में नसीर का जवाब नहीं.
फ़िल्म मूल रूप से अंग्रेज़ी भाषा में है. इसका प्रस्तुतीकरण अंग्रेज़ी भाषा में बनी तमाम भारतीय फ़िल्मों से बेहतर है.
'फ़ाइंडिंग फ़ेनी'
फ़िल्म हिंदी में भी है लेकिन शायद आप इसका असल लुत्फ़ अंग्रेज़ी भाषा में ही उठा पाएंगे.
अर्जुन कपूर और दीपिका पादुकोण जैसे मेनस्ट्रीम कलाकारों का ऐसी फ़िल्म चुनना सुखद बात है.
अच्छा लगता है जब ऐसे लोकप्रिय कलाकार उस फ़िल्म से जुड़े, जो आम मसाला फ़िल्मों से अलग है और एक ख़ास दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई है.
बॉक्स ऑफ़िस पर 'फ़ाइंडिंग फ़ैनी' की शुरुआत चाहे जैसी हो. ये समय के साथ 
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment