जोधपुर।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की ओर से गत फरवरी में आयोजित द्वितीय ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में एक अभ्यर्थी ने किसी अन्य से परीक्षा दिलाकर चयन करवा लिया, लेकिन वह दस्तावेज सत्यापन करवाने के लिए आयोग के कार्यालय पहुंचा तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। आयोग ने अजमेर के स्थानीय थाने में बिना नंबर की एफआइआर दर्ज कराई। जिसे अग्रिम कार्रवाई के लिए अब खाण्डा फलसा थाने में दर्ज की गई है। अभ्यर्थी को हिरासत में लिया गया है ।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निशांत भारद्वाज ने बताया कि आरपीएससी की ओर से गत वर्ष फरवरी में द्वितीय ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा ली गई थी। खाण्डा फलसा थानान्तर्गत सिवांची गेट के जयनारायण व्यास गर्ल्स स्कूल में परीक्षा का सेंटर था। पीपाड़ शहर थानान्तर्गत तिलवासनी में घाणा मगरा रोड निवासी प्रेमराज पुत्र बाबूलाल ने विज्ञान की परीक्षा में अपनी जगह किसी अन्य को बतौर फर्जी अभ्यर्थी भेजकर परीक्षा दिला दी थी।
पहचान पत्र के लिए आवश्यक आधार कार्ड और प्रवेश पत्र में मिलती जुलती फोटो लगा दी गई थी। परीक्षा का परिणा घोषित होने पर प्रेमराज का चयन हो गया। वह आरपीएससी में अपने शैक्षणिक दस्तावेज सत्यापन कराने पहुंचा, जहां जांच करने पर परीक्षा देने के दौरान पहचान पत्र से उसके फोटो का मिलान नहीं हुआ। ऐसे में उसके स्थान किसी अन्य अभ्यर्थी के बैठने की पुष्टि हुई। आरपीएससी के अनुभाग अधिकारी नमन शर्मा ने अजमेर के स्थानीय थाने में बिना नम्बर की एफआइआर दर्ज करवाई। साथ ही आरोपी युवक को भी पुलिस के सुपुर्द किया। चूंकि मामला खाण्डा फलसा थाने का है, इसलिए अग्रिम जांच के लिए एफआइआर को पुलिस उपायुक्त पूर्व कार्यालय भेजी। पुलिस ने धोखाधड़ी, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम व आइटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी प्रेमराज को हिरासत में लिया। एफआइआर दर्ज करवाने वाले अनुभाग अधिकारी के बयान दर्ज करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।
जांच में सामने आएगा कौन है फर्जी अभ्यर्थी
पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जाएगी। तब फर्जी अभ्यर्थी का पता लग पाएगा। वहीं, परीक्षा केंद्र में लगे परीक्षा सेंटर के कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में भी किसी फर्जी अभ्यर्थी का पता लग सकेगा।
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