जोधपुर. 9 साल में दो बार कैंसर जैसी बीमारी से सामना हुआ, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। हौसला ऐसा कि यह गंभीर बीमारी भी इनके सामने दो बार हार गई। अपने परिवार की ताकत पर 66 साल की उम्र में भी मजबूती से खड़े हैं। यह कहानी है जोधपुर के त्रिलोकचंद नाथ की।
त्रिलोक भारतीय रेलवे में टीटीई के पद से सेवानिवृत्त हैं। 2014 में उन्हें पहली बार पता चला कि स्टेज 2 कैंसर है। इसके बाद उनकी संघर्ष यात्रा शुरू हुई। उन्होंने बहुत ही दर्दनाक दौर देखा। मुंह का कैंसर था, जिसका उपचार करवाने के लिए बीकानेर जाना पड़ता था। हर सप्ताह जाना और वापस आना। यह सफर 3 महीने तक जारी रहा। इस संघर्ष और खौफ के साए में उन्होंने जिंदगी की खूबसूरती भी देखी। 7 साल बाद फिर आया खौफ कैंसर के खिलाफ पहली लड़ाई जीतने के 7 साल बाद फिर से उनको िफर से कैंसर बीमारी ने जकड़ लिया। मुंह का कैंसर एक बार फिर से सामने आया।
स्थानीय स्तर पर एम्स में उपचार करवाने व परिजनों की देखभाल के कारण उन्होंने दूसरी बार भी कैंसर को हरा दिया। वे बताते हैं कि जानलेवा बीमारी का खौफ है, लेकिन हौसलों के आगे सब फीका है। उनकी पत्नी दुर्गा, बेटी ऋतु, बहू संतोष, बेटा पंकज व मित्र ने हौसला बढ़ाया।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/bfWAOXy
0 comments:
Post a Comment