जोधपुर। फिजिक्स, कैमिस्ट्री एंड मैथ्स को याद रख नहीं पा रहे..., किताब लेकर बैठने के बाद भी कुछ याद नहीं हो रहा है..., पिछले पांच सालों के पेपर पढ़ लेने से क्या काम चल जाएगा..., पढ़ाई करने के लिए कौन सा वक्त अच्छा रहेगा..., परीक्षा नजदीक होने से बहुत डर लग रहा है..., घबराहट के कारण सेहत भी बिगड़ रही है..., पढ़ाई के साथ हेल्थ का कैसे ध्यान रखा जाए... जैसे इस तरह के कुछ सवाल स्टूडेंट्स के मन मस्तिष्क में आने लगे रहै। परीक्षा की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे ही स्टूडेंट्स की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स की समस्याओं को सुलझाने व लर्निंग पावर बढ़ाने के लिए एक्सपर्ट पढ़ाई के साथ खानपान ओर हेल्थ से संबंधित परामर्श देकर मदद कर रहे है।
पैरेंट्स बनाए बच्चों का टाइमटेबल
राबाउमावि किसान कन्या के फिजिक्स के व्याख्याता देवेंद्र गहलोत ने बताया कि 12वीं बोर्ड साइंस के स्टूडेंट्स की प्रैक्टिकल परीक्षा प्रारंभ हो गई है। ऐसे में प्रैक्टिकल की तैयारी के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि मार्क्स कहां पर कटते है। जिन बिंदुओं के मार्क्स हैं, उन्हें अच्छी तरह से लिखने के साथ प्रस्तुतीकरण करना आवश्यक है। ऐसे में स्टूडेंट्स को क्रियाकलाप, परियोजनाएं, प्रेक्षणसारणी व गणना के साथ-साथ प्रयोग में कौन-कौन से उपकरण लगे हैं, उनकी बनावट, कार्य प्रणाली, सिद्धांत की जानकारी भी होनी चाहिए। वहीं प्रयोग से संबंधित चैप्टर विद्युत धारा, किरण प्रकाशिकी, अर्धचालक युक्तियां भी स्टूडेंट्स को याद करनी चाहिए। इससे प्रैक्टिकल में अच्छे मार्क्स आ सकते है। इसी तरह राबाउमावि श्यामा सदन की प्राचार्य डॉ शीला आसोपा ने बताया कि बच्चों के अंदर दूसरे स्कूल में परीक्षा होने और कॉपियां बाहर जाकर चैक होने का डर रहता है। कई बार पैरेंट्स भी पढ़ाई के लिए बच्चों पर दवाब डालते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को समझाते है कि हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। हर बच्चा क्लास में फर्स्ट नहीं आ सकता है। पैरेंट्स बच्चे की पढ़ाई व खाने-पीने का टाइम टेबल बनाकर पढ़ने में मदद करें। कुछ बच्चे लिखकर अच्छा याद करते हैं तो कुछ जोर-जोर से बोल कर। ऐसे में बच्चे पर आदत बदलने का दबाव न डालें। बच्चों से उनका मनोबल बढ़ाने वाली बातें करें। जिससे बच्चों को परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिल सकें।
हेल्दी फूड के साथ पर्याप्त नींद जरूरी
इंडियन डायटेटिक एसोसिएशन सदस्य व एक्सपर्ट डाइटिशियन दीक्षा सेन ने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के दिनों में स्टूडेंट्स मानसिक रूप से स्ट्रेस में रहते हैं। जिससे ज्यादातर स्टूडेंट खाना-पीना और सोना सब छोड़ देते हैं। वहीं स्ट्रेस के कारण उनमें हार्मोन का असंतुलन होने लगता है, इससे कुछ स्टूडेंट्स को भूख ज्यादा लगती है तो कुछ को कम लगती है। ऐसे में परीक्षा के दिनों में ना तो खाली पेट रहें और ना ही जरूरत से ज्यादा डाइट लें। डाइट में दूध, सूप, फल, हरी सब्जियां को अवश्य शामिल करें। अपने पढ़ाई के टाइम टेबल में नींद को उचित घंटे प्रदान करें, ताकि हमेशा एनर्जेटिक रह सकें। रात को सोते समय एक गिलास गुनगुना पानी पीकर सोए। पढ़ाई करते समय कुछ खाने की इच्छा होने पर रोस्टेड मखाना, चना, पीनट्स, कद्दू के बीज व अलसी के बीज जैसे हेल्दी स्नैक्स लेंवे। वहीं साबूत अनाज, दलिया, बाजरा और रागी की रोटी जैसा हाई फाइबर भोजन भी लेंवे। अधिक मात्र में पेय पदार्थों का सेवन करें। इससे मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का स्तर बढ़ेगा और अच्छी नींद आने के साथ स्वस्थ मन से पढ़ाई करने में मदद मिलेगी।
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