यहां गर्म शलाका जलाती नहीं, दर्द से राहत देती है, जाने वजह

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जयकुमार भाटी/जोधपुर। गर्दन, कमर, घुटने जोड़ों के दर्द, स्लिप डिस्क, मस्सा और हाथ-पैरों की ऐंठन का इलाज अब आग से भी संभव है। ऐसे में शहर के राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय पूंजला में अग्निकर्म से इलाज के लिए मरीजों की भीड़ रहने लगी है। यहां पंच धातुओं से बनी शलाका से रोगों के उपचार का दावा किया गया है। आयुर्वेद के अग्निकर्म पर लोगों का भरोसा बढ़ने और दर्द से राहत मिलने से अब तक करीब एक हजार से अधिक रोगियों का उपचार किया गया हैं। वहीं अग्निकर्म से इलाज लेने के लिए शहर ही नहीं बल्कि प्रदेशभर से लोग आ रहे हैं। चिकित्साधिकारी डॉ. कृष्ण गोपाल शर्मा का कहना है कि इस विधि के प्रयोग से किसी तरह का कोई नुकसान शरीर में नहीं पहुंचता, बल्कि जोड़ों के दर्द में अग्निकर्म बहुत उपयोगी है।


अग्नि शलाका से जलन का नहीं होता है एहसास
डॉ. कृष्ण गोपाल शर्मा ने कहा कि दर्द से परेशान लोग जब सभी जगह इलाज लेकर थक जाते हैं तो अग्निकर्म के लिए यहां आते हैं। इस विधि में पंच धातु (लोह, ताम्र, रजत, वंग, कांस्य) से बनी अग्नि शलाका का उपयोग लिया जाता हैं। इसे गर्म करके शरीर के दर्द वाले हिस्से पर विशेष ऊर्जा (गर्मी) देकर राहत पहुंचाई जाती है। यह शरीर की विभिन्न मांसपेशियों और उनके विकारों को सही करने के लिए उपयोगी है। इससे उपचार करने पर मरीज को किसी भी तरह का कोई कष्ट महसूस नहीं होता। दर्द अ धिक होने पर प्रतिदिन तथा कम दर्द होने पर सप्ताह में एक व दो दिन इस विधि को अपनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से इलाज के लिए दूर दराज क्षेत्रों से लोग आते हैं।


पैरों की ऐंठन का करवाया इलाज
जिला के बाप तहसील के चंपासर गांव के जुगलकिशोर लीलावत ने बताया कि डेढ़ वर्ष पहले दाहिने पैर में ऐंठन हो रखा था। इसके लिए ऑपरेशन करवाने के बाद भी बीमारी से निजात नहीं मिला। ऐसे में मगरा पूंजला स्थित आयुर्वेद अस्पताल में अग्निकर्म से इसके इलाज की जानकारी मिली। यहां एक माह तक अग्निकर्म वि धि से इलाज कराने के बाद पैर की ऐंठन से राहत मिली हैं।


घुटने के दर्द से मिली राहत
मगरा पूंजला निवासी सुमन ने बताया कि मेरे घुटने में लंबे समय से दर्द था। इसके लिए एलोपेथी के चिकित्सकों से कई बार इलाज करवाया। लेकिन दर्द कम होने का नाम तक नहीं ले रहा था। ऐसे में आयुर्वेद अस्पताल में अग्निकर्म से इलाज करवाने पर एक बार में ही ठीक हो गया।



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