non practice allowance : वेटरनरी डॉक्टरों को नॉन प्रैक्टिस भत्ता नहीं मिलने से हर माह 12 से 30 हजार रुपए का नुकसान

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नाराज वेटरनरी डॉक्टर 10 दिन से सामूहिक अवकाश पर, काम-काज ठप
जोधपुर. वेटरनरी डॉक्टरों को नॉन प्रैक्टिस भत्ता नहीं मिलने से उन्हें हर माह 12 से 30 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली सहित कई राज्यों में 20 से 25 प्रतिशत तक नॉन प्रैक्टिस भत्ता दिया जाता है।

राजस्थान पशु चिकित्सक संघ एवं वेटरनरी एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर पर 10वें दिन भी वेटरनरी डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहे। रातानाडा में आंदोलनरत पशु चिकित्सकों ने धरना दिया। अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर अनदेखी के खिलाफ नारेबाजी की।

यहां नॉन प्रैक्टस भत्ता

दिल्ली, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, उत्तराखंड तथा पश्चिम बंगाल।

ये काम ठप

पशु चिकित्सा, गोपालन, कामधेनू बीमा, पशुपालन संबंधी प्रशिक्षण, रोग निदान कार्य, वन्य जीवों की आपात चिकित्सा एवं पहले से बीमित पशुओं का शव परीक्षण।

विधायकों से मिले

वेटरनरी डॉक्टरों का शिष्टमंडल बुधवार को सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास तथा लूणी विधायक महेंद्र बिश्नोई से मिला। शिष्टमंडल ने विधायकों को दिए ज्ञापन में नॉन प्रैक्टिस भत्ता की उनकी मांग का समर्थन करने का आग्रह किया। दोनों विधायकों ने यथासंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

जारी रहेगा बहिष्कार

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय के बाहर वेटरनरी डॉक्टरों के धरने पर राजस्थान पशु चिकित्सक संघ संभागीय उपाध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र राजपुरोहित तथा पशु चिकित्सक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. धर्माराम चौधरी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदेश की सरकार वत्रनरी डॉक्टरों को नॉन प्रैक्टिस भत्ता देने का आदेश जारी नहीं करेगी, तब तक हम सामूहिक अवकाश पर रहकर कार्य बहिष्कार करेंगे।

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एक्सपर्ट ऑपिनियन

दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देश में पहले नंबर पर है। सीमित संसाधनों के बावजूद राजस्थान में पशुपालन का काम बेहतर ढंग से हो रहा है। एक-एक वेटरनरी डॉक्टर के पास कई अस्पतालों का चार्ज है। प्रदेश में स्वीकृत पदों के अनुरूप वेटरनरी डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए और नॉन प्रैक्टिस भत्ता शुरू कर दिया जाए तो पशुपालन के प्रयासों को गति दी जा सकती है। प्रदेश में खेतीबाड़ी और पशुपालन आजीविका का प्रमुख जरिया है। इस पर समुचित ध्यान देकर अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सकती है। इसी से प्रदेश में खुशहाली आएगी।

- डॉ. हनुमान सियाग, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी



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