MARWAR की SANGRI में पौषक तत्व ज्यादा, बनेंगे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट

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अमित दवे

जोधपुर।

मारवाड़ की पारंपरिक खेजड़ी की फली सांगरी में पौषक तत्वों की प्रचुरता है। मारवाड़ में प्रमुखता से खाई जाने वाली सांगरी की अब देश-विदेशों में बड़ी डिमाण्ड़ है। सांगरी न केवल सब्जी बल्कि अब इसके कई वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स बनेंगे, जो कई बीमारियों के निदान में मुख्य भूमिका निभाएंगे। कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर पं राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रोें में पाई जाने वाली सांगरी पर शोध करेगा। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय व ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग (निदेशालय जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण, राजस्थान) के बीच समझौता किया गया है। समझौते के आधार पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने कृषि विश्वविद्यालय को सांगरी पर शोध, पश्चिमी राजस्थान के जलग्रहण क्षेत्रों सहित विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए 7.80 करोड़ स्वीकृत किए है। कृषि विवि के प्रसार शिक्षा के सह निदेशक डॉ प्रदीप पगारिया ने बताया कि तीन वर्षीय समझौते के अनुसार कृषि विवि जोधपुर के क्षेत्राधिकार वाले जिलों में इन परियोजनाओं के माध्यम से कार्य किया जाएगा।

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सांगरी सुखाने की तकनीक विकसित की जाएगी

प्रोजेक्ट के तहत विवि की ओर से सांगरी सुखाने की तकनीक विकसित की जाएगी। वर्तमान में, पारंपरिक तरीके से सांगरी को सुखाने से उसका रंग व पौषक तत्वों कम होना पाया गया है। नई तकनीक से सांगरी सुखाने से सांगरी का रंग व पौषक तत्व बरकरार रहेंगे।

- सांगरी कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक।- सांगरी में मैग्नीशियम व जिंक सहित अन्य पौषक तत्वों की अच्छी मात्रा।

- सांगरी की प्रसंस्करण लाइन का विकास करके स्थानीय उद्यमिता के माध्यम से सीमांत किसानों की आजीविका की स्थिति में सुधार किया जाएगा।

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इन प्रोजेक्ट्स पर भी होगा काम

- टिश्यू कल्चर लेब व नर्सरी की स्थापना।

- कांटे रहित कैक्टस थार जानवरों के लिए नया चारा।

- घास और पेड़ों में टिकाऊ बीज उत्पादन को बढ़ावा देना।

- शुष्क-बागवानी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल का विकास ।

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परियोजना के तहत विवि के क्षेत्राधिकार वाले जिलों में जैवविविधता, पशुओं के लिए चारागृह के बीज उत्पादन आदि पर कार्य किया जाएगा।

प्रो बीआर चौधरी, कुलपति

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

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