kamdhenu pashu bima yojana : जोधपुर के 5,69,782 पशुपालकों को पशुबीमा का इंतजार

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महंगाई राहत शिविरों मिले पशु बीमा गारंटी कार्ड लेकर पशु चिकित्सालय पहुंच रहे पशुपालक
- हनुमान गालवा
जोधपुर. प्रदेश में 6 सितंबर को कामधेनु पशुबीमा योाजना समरोहपूर्वक लागू हो गई, लेकिन नॉन प्रैक्टिस भत्ता की मांग को लेकर वेटनरी डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने के कारण महंगाई राहत शिविरों में पंजीकृत पशुओं के बीमा की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। ऐसे में योजना लागू होने के बावजूद पशुओं के मरने की स्थिति में पशुपालकों को बीमा क्लेम नहीं मिल पा रहा है।
कामधेनु बीमा योजना में महंगाई राहत शिविरों में जोधपुर संभाग में 19,52,048 पशुपालकों ने अपने पशुओं का पंजीयन करवाया। जोधपुर जिले में बीमा के लिए 5,69,782 पशुपालकों ने इस योाजना में पंजीयन करवाया। प्रदेश में 6 सितंबर को कामधेनु बीमा योजना का शुभारंभ किया गया और 18 सितंबर से वेटनरी डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर हैं। ऐसे में महंगाई राहत शिविर में पंजीकृत पशुपालकों के पशुओं के बीमा की वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। एक भी पशुपालक को 23 सितंबर तक पशु के मरने की स्थिति में बीमा क्लेक का हकदार नहीं है।

कामधेनु बीमा योजना
- 02 पशुओं का नि:शुल्क बीमा हर पशुपालक परविार में।
- 1.10 करोड पशुपालक परिवारों ने प्रदेश में किया आवेदन।
- 80 लाख पशुओं के बीमा के लिए 750 करोड़ रुपए का प्रावधान।
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181 पोर्टल पर शिकायतें
प्रदेश में 80 लाख पशुओं का बीमा किया जाना है। इसके साथ ही बीमा क्लेम के लिए मरने वाले पशुओं के शव परीक्षण भी करना होगा। पशुपालक पशु मरने पर पशु बीमा गारंटी कार्ड लेकर पशु चिकित्सालय पहुंच रहे हैं, लेकिन बीमा क्लेम राशि नही मिलने पर रोजाना 181 पोर्टल पर शिकायतें दर्ज हो रही है।
कई पशुपालक क्लेम से वंचित
कुड़ी भगतासनी निवासी विरदाराम चौधरी, धुंधाड़ा (ओसियां) निवासी प्रभुराम, मंडोर निवासी हीरालाल विश्नोई, ओसियां निवासी खुशाल सिंह के पशु कामधेनु बीमा योजना लागू होने के बाद मर गए। इन पशुपालकों ने अपने पशुओं का महंगाई राहत शिविर में कामधेनु बीमा योजना में पंजीकरण भी करवाया था। वेटरनरी डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने के कारण पंजीकृत पशुओं के बीमा की प्रक्रिया नहीं हो पाई। पशु की मृत्यु हो जाने पर बीमा नहीं होने के कारण बीमा क्लेम का लाभ नही ले पाए है।
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पहले दिन से ही बहिष्कार
पशु चिकित्सकों ने नॉन प्रेक्टिस भत्ता की स्वीकृति जारी नहीं करने के कारण कामधेनु बीमा योजना का शुभारंभ किए जाने के दिन से ही बहिष्कार किया गया। पशु चिकित्सक प्रत्येक पशु का स्वास्थ्य परीक्षण एवं वास्तविक मूल्य का आंकलन कर पशु बीमा पालिसी जारी करते हैं। सरकार को नॉन प्रेक्टिस भत्ता देने का आदेश जारी करना चाहिए, ताकि गतिरोध टूटे और पशुपालकों और वेटनरी डॉक्टरों को राहत मिले।
- डॉ.नरेन्द्र सिह राजपुरोहित, संभागिय उपाध्यक्ष, राजस्थान पशु चिकित्सक संघ



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