जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निवेशकों को दुगुनी और तिगुनी राशि का झांसा देकर फरार होने वाली चिटफंड कंपनियों के खिलाफ दर्ज मामलों और उनकी मौजूदा जांच के स्टेटस का ब्यौरा मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह तथा न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की खंडपीठ में बिश्नोई टाईगर वन्य एवं पर्यावरण संस्थान की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता करण सिंह राजपुरोहित ने पुलिस महानिदेश की ओर से अपेक्षित विवरण दाखिल करने के लिए समय चाहा, जिस पर खंडपीठ ने अगली सुनवाई 2 नवंबर को मुकर्रर की है।
400 करोड़ रुपए का घपला
याचिका के अनुसार सीमावर्ती बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, जालोर सहित कई जिलों में निवेशकों से 400 करोड़ रुपए का घपला कर अलग-अलग नाम से काम कर रही दस चिटफंड कंपनियां बंद हो गई हैं और इनके संचालक फरार है। कंपनियों ने निवेशकों को प्रलोभन दिया था कि उन्हें दुगुनी और तिगुनी राशि दी जाएगी। जब राशि लेने का समय आया तो कंपनियां बंद हो गई। इससे हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपए डूब गए। आरोपियों ने एलआईसी का फर्जी लोगो इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में फंसाया और पिछले 8-9 सालों में करोड़ों रुपए जमा कर लिए। निवेशकों ने बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, पाली, जालोर, नागौर, सांचोर सहित कई जिलों में धोखाधड़ी कर लाखों रुपए ऐंठने के मामले दर्ज करवाए हैं।
कई कंपनियों का पंजीयन नहीं
याचिका के अनुसार सीमैक्स मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, ए सीमैक्स मार्केटिंग लिमिटेड, साइबर मैक्स इंश्योरेन्स कांसलमेंट, साइबर मैक्स मैनेजमेंट कांटलमेंट प्राइवेट लिमिटेड, सीमैक्स बाजार, साइबर मैक्स फाउंडेशन, सीमैक्स क्रेडिट कॉ-आपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, पीआर बिजनेश सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, सीमैक्स ग्लोबल मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनियों ने दफ्तर लगाए। नियमानुसार चिटफंड कंपनियों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एवं भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) से कानूनन पंजीकृत करवाना होता है, लेकिन इन कंपनियों ने पंजीयन नहीं करवाया है।
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