कुरंजा को पसंद आ गया मंगोलिया, अभी तक नहीं पहुंची फलोदी, जानिए क्या है इसके पीछे का कारण

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फलोदी। फलोदी जिले को विश्वपटल पर पहचान दिलाने वाली सायबेरियन बर्ड कुरजां इस साल एक महीने की देरी से भारत में प्रवेश करेगी। इसका सबसे बड़ा कारण बदल रही मौसम की परिस्थतियों को माना जा रहा है। पहले अधिकमास व अब सावन की सुहानी आबोहवा में मादा कुरजां अपने चूजों की देखभाल कर रही है। गौरतलब है कि इस साल अधिकमास होने से भी मौसम का क्लाइमेंट बदला है, जिसके चलते कुरजां की दिनचर्या, आहार-विहार के साथ ब्रिडिंग सिस्टम भी प्रभावित रहा और वहां के मौसम की परिस्थितियां भी रहवास के प्रतिकूल बनी हुई है। जिसके चलते इस साल कुरजां के भारत लौटने के समय में परिवर्तन होने के कयास है। जानकारों की माने तो कुरजां अगस्त में भारत के यूपी में प्रवेश कर लेती है और करीब 25 अगस्त से एक सितंबर तक राजस्थान के खीचन में पहुंच जाती है, लेकिन इस सीजन में अभी तक कुरजां भारत के यूपी तो दूर नेपाल में भी नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में कुरजां के एक से डेढ़ महीने की देरी से पहुंचने के आसार हैं।

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मंगोलिया से नहीं भरी उड़ान
विशेषज्ञों की मानें तो मंगोलिया से भारत की सरजमीं तक पहुंचने में कुरजां को एक से डेढ़ माह तक आकाश में उड़ान का सफर करती है और हिमालय की चोटी के ऊपर से नेपाल के रास्ते भारत के यूपी में उतरती हैं, यहां से राजस्थान के धौलपुर होते हुए खींचन आती है, लेकिन अभी तक कुरजां नेपाल नहीं पहुंची है। जिससे अभी तक कुरजां के यहां पहुंचने के लिए कईं दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। जिसका एक बड़ा कारण मंगोलियां में तापमान में गिरावट नहीं होना और ब्रिडिंग में देरी के कारण चूजों के उड़ान भरने में असक्षमता को भी माना जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो कुरजां के उड़ान भरने से पहले कुरजां के रहवास स्थल खुर्ख-खुतेनी वैली मंगोलिया में वैज्ञानिकों की टीम ने शिविर लगा रखा है। जो कुरजां व उनके चूजों की देखभाल कर रहे हैं। साथ ही कुरजां की सुरक्षा व रूट सुगमता से हो सके, इसके लिए चूजों के पैरों पर टैगिंग की जा रही है। जिससे कुरजां के रहवास स्थलों व उनके जीवन के लिए आ रही दुविधा को दूर किया जा सके।

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सप्ताहभर की देरी से आई थी गत साल
जानकारों की माने तो गत साल कुरजां एक सप्ताह की देरी से खीचन पहुंची थी, वहीं वापसी 11 दिन देरी से की थी। जानकारों के अनुसार 2021 में कुरजां 26 अगस्त को आई थी और 20 मार्च को लौट गई, वहीं 2022 को एक सितंबर को आई और 31 मार्च को वापसी की थी।

गत साल एक सितंबर को आई थी
फलोदी के खीचन में गत साल एक सितंबर को कुरजां का आगमन हुआ था। इस साल भी उम्मीद है कि कुरजां समय पर ही खीचन में प्रवेश करेगी।
सेवाराम माली, कुरजां प्रेमी, खीचन

अभी तक नहीं भरी उड़ान
इस साल बारिश अधिक होने से सायबेरियन बर्ड कुरजां के रहवास स्थल खुर्ख खौतीनी वेली में मौसम अनुकूल बना हुआ है। जिससे अभी तक कुरजां वहीं पर ठहराव कर रही है। गत महिने की 29 जुलाई को टेगिंग की रही थी। ऐसे में एक महिने की देरी से उड़ान भरने की उम्मीद है। इस साल कुरजां के आने में देरी हो सकती है।
डॉ. दाऊलाल बोहरा, सदस्य आईयूसीएन



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