जोधपुर।
एक तरफ सरकार रोडवेज बसों में यात्रियों को रियायतें देकर वाहवाही लूट रही है। वहीं, दूसरी ओर से रोडवेज बेड़े में नई बसें बढ़ानें, नए रुटों पर बसों के संचालन व गांवों तक बसें पहुंचाने के मामले में ध्यान ही नहीं दे रही है। हाल यह है कि जोधपुर जिले के कई गांवों में अभी तक रोडवेज बसें नहीं पहुंची है। जिले की 21 पंचायत समितियों में से 6 पंचायत समिति मुख्यालय आज भी रोडवेज बस सेवा से वंचित है। केरु, लूणी, चामू, सेखाला, घंटियाली व बापिणी जिला क्षेत्र के अधीनस्थ 627 में से मात्र 188 ग्राम पंचायतों पर ही रोडवेज बसें चल रही है, जबकि 439 ग्राम पंचायतें आज भी रोडवेज बसों के संचालन से वंचित है।
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पुलिस-परिवहन विभाग नहीं लगा रहे प्राइवेट बसों पर लगाम
रोडवेज बसों का संचालन नहीं होने से जिले के विभिन्न रुटों पर प्राइवेट बसें दौड़ती है। जो लोगों से मनमर्जी का किराया वसूल कर रही है। इससे रोडवेज बसों के आगे-पीछे निजी बसों का संचालन होने से रोडवेज की आय प्रभावित हो रही है। सुबह-शाम को बस स्टैण्ड के बाहर से निजी बसें संचालित होती है फिर भी पुलिस व परिवहन विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहे है।
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धरातल पर नहीं ग्रामीण परिवहन सेवा
राज्य सरकार की ओर से पूर्व में ग्रामीण परिवहन सेवा के नाम पर राजस्थान रोडवेज से संचालन नहीं करवा कर पीपीपी मोड पर वाहनों का संचालन करवाया गया। निजी ऑपरेटर्स को वाहनों के संचालन का फायदा दिया गया। उनकी ओर से आदेशों की पालना नहीं करने व मनमाने रुटों पर बसें चलाने के कारण ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर यह सेवा धीरे-धीरे बंद हो गई।
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सभी रुटों पर बसों के संचालन का प्रस्ताव भेजा है। फिर भी, उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम गांवों को जोड़ने का प्रयास कर रहे है।
उम्मेदसिंह, मुख्य प्रबंधक
रोडवेज जोधपुर
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जिले के सभी रुटों पर नियमित बसों के संचालन की मांग कर रहे है। राजस्थान रोडवेज को राज्य सरकार में शामिल कर सरकारी बेड़े में वाहनों का अधिकतम उपयोग कर प्रत्येक गांव-ढाणी, तहसील, उपखण्ड मुख्यालय को निगम सेवा से जोड़ा जाए।
धर्मवीर सैन, अध्यक्षमंत्रालयिक एवं अधीनस्थ कर्मचारी संघ
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