जोधपुर।
श्रावण माह की अमावस्या के दूसरे दिन 18 जुलाई मंगलवार से अधिक मास शुरू हो जाएगा। इसे मलमास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस बार 19 साल बाद सावन महीने में अधिक मास का विशेष संयोग बना है। मलमास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा। 17 अगस्त से सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होगा। ज्योतिषियों की राय है कि इस माह में भगवान शंकर और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से लाभ मिलेगा। महादेव अमरनाथ किला रोड के पं कमलेशकुमार दवे के अनुसार इस मास में शालीग्राम भगवान की उपासना से भी विशेष लाभ मिलता है। अधिक मास में श्रीमद्भागवत गीता के 14वें अध्याय का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में उत्पन्न हो रही परेशानियां दूर हो जाती है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार हर तीन साल पर अधिकमास यानी मलमास आता है।
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नहीं होंगे शुभ कार्य
अधिकमास यानी मलमास में विवाह जैसे कई शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। इसके अलावा नया व्यवसाय भी शुरू नहीं किया जाता है। पं अनीष व्यास के अनुसार इस मास में कर्णवेधन, मुंडन आदि कार्य भी वर्जित माने जाते हैं। सूर्य और चंद्र वर्ष के बीच के अंतराल को मलमास संतुलित करता है। इस मास में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। ऐसे में गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं होंगे।
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दान का खास महत्व
अधिक मास में जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, जूते-चप्पल, कपड़ों व छतरी का दान करना चाहिए। किसी मंदिर में शिवजी से जुड़ी चीजें जैसे चंदन, अबीर, गुलाल, हार-फूल, बिल्व पत्र, दूध, दही, घी आदि का दान कर सकते हैं।
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