खारिया मीठापुर। भावी कस्बे में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय सरकारी विद्यालय को यहां की प्रधानाध्यापिका ने भामाशाहों व स्वयं के आर्थिक सहयोग से कायाकल्प कर बदल दिया। जिसे देखकर हर कोई प्रशंसा के पुल बांध रहा है। सरपंच सुराराम सीरवी एवं महीपाल कड़वासरा ने बताया कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका चंपा चौधरी ने उत्साह, उमंग, जुनून और इच्छाशक्ति से सबसे पहले स्वयं के वेतन के पैसों और बाद में भामाशाहों के आर्थिक सहयोग से विद्यालय में नवाचार करना प्रारंभ किया। शिक्षिका के जुनून को देखते हुए धीरे-धीरे भामाशाह, कई प्राइवेट कंपनियां एवं सरकारी बैंक जुड़ते गए। इसके बाद ग्रामीण और ग्राम पंचायत ने भी सहयोग किया।
यह भी पढ़ें- IMD Rain Alert: मौसम विभाग की ताजा चेतावनी, अगले 3 घंटों के भीतर यहां होने वाली है बारिश, रहें सावधान
सौर ऊर्जा से स्कूल में 24 घंटे बिजली
प्रधानाध्यापिका चंपा चौधरी ने विद्यालय में सबसे पहले स्वयं की लागत से सरस्वती माता का मंदिर बनवाया। इसके बाद पूरे विद्यालय में सौर ऊर्जा का पैनल सिस्टम लगाया, सौर ऊर्जा से स्कूल में 24 घंटे बिजली रहती है। इनवर्टर, विद्यालय के छत के पानी को वाटर हार्वेस्टिंग से जोडऩा, विद्यालय में प्राइवेट कंपनी द्वारा 13 लाख की लागत से ओपन जिम स्थापित करवाना, विद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगवाना, कक्षा कक्ष को स्मार्ट क्लासरूम बनाना, पूरे मैदान में पेड़ पौधे लगवाना, झूले एवं फिसल पटिया लगवाना, कक्षाओं का अंदरूनी परिवर्तन कर पढ़ने के लिए रनिंग बोर्ड का निर्माण अंदरूनी सजावट, एक स्मार्ट कक्ष का निर्माण, सहित तमाम निर्माण कार्य करवा सरकारी विद्यालय को आधुनिक सुविधायुक्त विद्यालय में बदल दिया। उपरोक्त सभी कार्यों पर लगभग 30 लाख की राशि भामाशाहों ने खर्च की।
यह भी पढ़ें- Heavy rain Alert: बस आज और कल का दिन भारी, मौसम विभाग की चेतावनी, यहां होगी भारी बारिश
बालिका शिक्षा स्तर को बढ़ाया
प्रधानाध्यापिका चंपा चौधरी ने इन तमाम विकास कार्यों के साथ-साथ विद्यालय की बच्चियों में शिक्षा के स्तर को भी बढ़ाया है। यहां की बच्चियां खेल जगत में भी परचम लहरा चुकी है। इस विद्यालय की बच्चियां इस साल खो -खो खेल में स्टेट में प्रथम रही। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को बढा़वा देने के लिए प्रधानाध्यापिका चौधरी ने विद्यालय में सैंकड़ों पौधे लगावाए। स्कूल की छुट्टी के बाद स्वयं ही गैती- फावड़ा उठाकर नए पेड़ पौधे लगाने, सार-संभाल करने एवं सफाई में अपना समय व्यतीत करती हैं।
मैं स्वयं को भाग्यशाली समझती हूं कि इस पद पर कार्यारंभ करने के लिए मुझे बेहतरीन स्कूल, समर्पित स्टाफ, सहयोग की भावना से परिपूर्ण ग्रामीण, अभिभावक व भामाशाह के साथ सकारात्मक सोच के धनी अधिकारियों का संबल प्राप्त हुआ।
चंपा चौधरी, प्रधानाध्यापिका, कस्तूरबा गांधी आवासीय सरकारी विद्यालय भावी
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/SP9fLwn
0 comments:
Post a Comment