आधनक मरवड क नरमत महरज उममदसह क जयत आज

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तीस साल के शासन में विकास के कई कीर्तिमान
आधुनिक मारवाड़ के निर्माता महाराजा उम्मेदसिंह की जयंती आज
- राजेंद्र सिंह लीलिया
मारवाड़ के शासकों में महाराजा उम्मेदसिंह कोआधुनिक मारवाड़ का निर्माता कहा जाता है। उनका शासनकाल विकास का स्वर्ण युग के रूप में याद किया जाता है। महाराजा उम्मेदसिंह अत्यन्त विवेकशील व प्रशासनिक गुणों से परिपूर्ण शासक थे। उनके कार्यकाल में प्रजा की सुविधाओं के लिए स्थाई विकास कार्य करवाए गए, जिनका उपयोग आज भी जोधपुर में मारवाड़ की जनता कर रही है।
महाराजा उम्मेदसिंह का जन्म 8 जुलाई, 1903 को जोधपुर में हुआ। बड़े भाई महाराजा सुमेरसिंह के निधन व उनके कोई पुत्र नहीं होने के कारण 16 वर्ष की उम्र में 14 अक्टूबर 1918 में मारवाड़ के महाराजा के रूप में शासन ग्रहण किया। महाराजा उम्मेदसिंह ने 9 जून 1947 तक तीस वर्ष शासन किया।
मारवाड़ में पड़े भीषण अकाल के समय जनता को रोजगार उपलब्ध कराने के सार्थक प्रयास किए। 18 नवंबर 1929 को उम्मेद भवन पैलेस निर्माण की योजना बनाई ताकि लोगों को रोजगार मिल सके। इसके निर्माण में 1 करोड़ 9 लाख 11 हजार रुपए व्यय हुए। उन्होंने महिलाओं व बच्चों की सुविधा के लिए 1934 में उम्मेद अस्पताल का निर्माण करवाया। आधुनिक चिकित्सा सुविधा के लिए 19 नवंबर 1929 का विंडम अस्पताल (अब एमजीएच अस्पताल) बनवाया। क्षय रोग चिकित्सा के लिए 1938 में क्षय रोग अस्पताल व कुचामन, परबतसर, लाडनू, मूण्डवा, सादड़ी, बाली, फलोदी, सांडेराव, शेरगढ़ सहित अन्य स्थानों पर चिकित्सा सुविधाएं विकसित की। खेल सुविधाओं की बढोत्तरी के लिए 14 अक्टूबर 1939 को स्टेडियम बनवाया। साथ ही भ्रमण के लिए वेलिंगटन गार्डन (अब उम्मेद उद्यान) का 1934 में निर्माण करवाया। मनोरंजन के लिए स्टेडियम सिनेमा का 14 अक्टूबर 1935 में निर्माण कराया।
मारवाड़ में न्याय व कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 14 अप्रेल, 1934 को जोधपुर में सिल्वर जुबली कोर्ट का निर्माण की योजना बनवायी व 1935 में इसका निर्माण शुरू हुआ। यह कोर्ट बाद में राजस्थान उच्च न्यायालय के रूप में व वर्तमान में इसमें जिला न्यायालय संचालित हो रहा है। जोधपुर में पानी की कमी को दूर करने के लिए पाली के हेमावास बांध से जोधपुर तक 60 मील लंबी जवाई नहर का निर्माण करवाया व चौपासनी में फिल्टर हाऊस बनवाया। उनके शासनकाल में1925-26 में जोधपुर हवाई अड्डे व उत्तरलाई हवाई अड्डे के निर्माण का कार्य शुरू हुआ। 1933 में मारवाड़ में 15 स्टेशन बनाए गए। 16 नवंबर 1931 को जोधपुर फ्लाइंग क्लब की स्थापना हुई। वर्ष 1932 में वायरलेस स्टेशन व 1942 में रेडियो प्रसार केंद्र की स्थापना हुई। शिक्षा के क्षेत्र में समुचित ध्यान दिया गया।
वर्ष 1939 में भयंकर अकाल के समय महाराजा ने सस्ते अनाज की दुकानें व गरीब के लिए राम रसोड़े खुलवाये, किसानों को तकाबी दी गई व गांवों में राहत कार्य खुलवाये। घी की कमी दूर करने के लिए वनस्पति घी का आयात किया। एक लाख तक के तकाबी ऋण माफ कर दिए गए।



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