बरश हत ह बल स बहर नकलन लग कबर और वइपर सप इतन लग क बनय अपन शकर

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फलोदी। बारिश की सीजन शुरू होने के साथ ही सांप बिलों से बाहर निकल कर इन्सानों को निशाना बनाना भी शुरू कर दिया है। फलोदी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के खेत खलिहानों में सर्पदंश के मामलों में इजाफा हो रहा है। हालात यह है कि इस एक सप्ताह में 11 लोग कोबरा व वाइपर दंश से घायल हो चुके है। ऐसी परिस्थितियों में भी फलोदी के जिला अस्पताल में फिजिशियन की सुविधा तक नहीं है। ऐसे में बिना फिजिशियन के ही अस्पताल में उपचार किया जा रहा है। जिला अस्पताल में फिजिशियन, सर्जन व एनेस्थेसिया सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी अब सर्पदंश का जहर झेल रहे पीड़ितों को खलने लगी है।

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नहीं आ रही भामाशाहों की सुविधाएं काम

- 1.50 करोड़ की लागत की सिटी स्कैन मशीन स्थापित है

- 44 ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटर मशीन है उपलब्ध

- 60 से अधिक ऑक्सीजन सिलेण्डर भी उपलब्ध

- 1 करोड़ की मशीनरी विधायक कोटे से कोविड में दी थी।

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फैक्ट फाइल

- 11 जने सात दिनों में हो चुके सर्पदंश के शिकार

- 10 लाख से अधिक की आबादी है नवसृजित फलोदी जिले की

- 5 दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों के उपचार के बाद मिलती है राहत

- 60 से अधिक सर्पदंश के शिकार हर माह आते है फलोदी अस्पताल

- 1 हजार से अधिक प्रतिदिन की ओपीडी है जिला अस्पताल की

- 300 से अधिक हर माह फलोदी में होते है प्रसव

- 100 से अधिक हर महीने होते है इमरजेंसी में रेफर

- 731 गांव है नवसृजित फलोदी जिले में

- 110 से अधिक ओपीडी समय में होते है एक्सरे व सोनोग्राफी

चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए प्रयास करता हूं। मुख्यमंत्री के ओएसडी से समय भी ले रखा है। चिकित्सकों की नियुक्ति के प्रयास करवाता हूं।

कुम्भसिंह पातावत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता


फलोदी जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी की बात आज ही मेरे संज्ञान में आई है। जयपुर जा रहा हूं। सीएम से वार्ता कर चिकित्सकों की नियुक्ति करवाने का प्रयास करूंगा।

सलीम नागौरी, पालिका उपाध्यक्ष


फलोदी में चिकित्सकों की कमी बड़ी दुविधा है। रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए कईं बार सीएम को लेटर लिखे है। ओएसडी को व्यक्तिगत तौर पर बताया भी है, लेकिन डॉक्टर नहीं आ रहे, जो आए वे भी वापस चले गये। कोई समाधान नहीं निकल सका।

महेश व्यास, प्रदेश सचिव कांग्रेस


बारिश के साथ अब सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही है। ऐसे में अस्पताल में फिजिशियन व अन्य चिकित्सकों की कमी महसूस हो रही है। सीमावर्ती क्षेत्र में सबसे पहले चिकित्सा सुविधाओं का ध्यान रखने की जरूरत है।

सुनील सोनी, जिलाध्यक्ष स्वर्णकार युवक संघ



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