SHANI-- शन चलग उलट चल 141 दन रहग वकर

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जोधपुर।

न्याय व कर्म के देवता शनिदेव वर्तमान में अपनी राशि कुंभ राशि में विराजमान हैं। शनि अब 17 जून को रात 10:57 बजे कुंभ राशि में रहते हुए वक्री चाल चलेंगे। वक्री चाल यानि उल्टी चाल से चलना होता है। शनि की यह वक्री चाल 4 नवंबर तक रहेगी। फिर इसके बाद कुंभ राशि में ही मार्गी हो जाएंगे। शनि 141 दिन वक्री अवस्था में रहेंगे। शनि के वक्री होने पर इसका प्रभाव सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रह-नक्षत्रों में शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह माने जाते हैं। शनि की उपस्थिति एक राशि में ढाई साल तक रहती है। शनि के कुंभ राशि में होने से मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के ऊपर इस समय शनि की साढ़ेसाती चल रही है।
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सत्ता-संगठन के लिए फायदेमंद

शनि करीब ढाई साल अपने घर में रहेंगे। जिससे देश के लिए यह बदलाव फायदेमंद होगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रगति होगी, लेकिन प्राकृतिक आपदा प्रभावित कर सकती है। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। देश में आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड, भूकंप, गैस दुर्घटना आदि होने की संभावना है।
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वक्री शनि का शुभ-अशुभ प्रभाव

शनि के शुभ प्रभाव से लोगों के रुके हुए काम पूरे होंगे। कुछ नौकरीपेशा लोगों के ट्रांसफर की स्थिति बन सकती है। प्रमोशन हो सकता है। कामकाज की जिम्मेदारी भी बढ़ने के योग हैं। बिजनेस करने वालों के भी काम करने की जगह पर बदलाव होगा। रहने की जगह भी बदल सकती है। वहीं, इसके अशुभ प्रभाव से कुछ लोगों को पैर में या हड्डी की चोट लग सकती है। ऑपरेशन की स्थिति भी बनेगी। साढ़ेसाती वालों को कर्जा लेना पड़ सकता है। कामकाज में बार-बार बदलाव की स्थितियां बनेंगी। प्रभावित जातकों को शिव उपासना और हनुमत उपासना करनी चाहिए। शनिवार को लोहे से बनी चीजों को दान करना भी श्रेष्ठ माना जाता है।
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इन राशियों पर होगा असर

शनि की उल्टी चाल का प्रभाव सबसे अधिक कर्क, सिंह, कन्या, मकर, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों पर पड़ेगा। इन सभी राशि पर शनि की टेढ़ी नजर होगी। यदि जातक की जन्म कुंडली में शनि शुभ स्थिति में हैं, तो शनि की वक्री चाल के समय भी शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।
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